वृंदावन (मथुरा)। अठखंभा स्थित राधामोहन मंदिर में सोमवार को हिम ऋतु मनोरथ शृंखला के अंतर्गत व्यंजन परंपरा से जुड़े ब्रजभाषा के पदों का गायन हुआ। साथ ही वाणी पूजन और दाल बाटी मनोरथ भी मनाया गया।
सेवायत गोवर्धन लाल गौड़ और डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि वाणी ग्रंथों में उल्लेख है कि ‘वृंदावन सोइ रितु प्रगटावै, जोई जोई दम्पति के मन भावै’। उन्होंने कहा ब्रज संस्कृति की मंदिर परम्परा में ऋतु अनुकूल सेवा विधान यहां की अपनी विशेषता है। वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक सतीशचंद्र दीक्षित और विष्णुमोहन नागार्च ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से प्रभु की ऋतु सेवा ब्रजभाषा काव्य के रूप में संकलन ब्रज संस्कृति की अभिनव देन है।
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी और डॉ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी ने भी जानकारी दी। मनोरथ के दौरान समाजियों ने पदों का गायन किया। इससे पूर्व महावाणी की प्राचीन पोथी का पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर सुरेश चंद्र शर्मा, दयाशंकर बौहरे, आचार्य देवकीनंदन, राधेश्याम गौड़, ब्रजमोहन खांडाल, पंकज दीक्षित, आनंद शर्मा, श्रीकांत शर्मा, मनीष गौतम, अभिषेक गर्ग, गोपाल शर्मा उपस्थित थे।