मथुरा। गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर के निकट बनी प्राइवेट कालोनी के निर्माण से जुुड़ी जनहित याचिका में मथुरा के डीएम और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट की अवमानना में फंस गए हैं। कोर्ट ने एक साल पहले प्राइवेट कालोनी के निर्माण पर उठाए गए सवालों की जांच उपरांत यथासंभव कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसका अनुपालन न होने पर हाईकोर्ट ने दोनों अफसरों को तलब कर लिया है।
गोवर्धन में 2001 के दौरान दानघाटी के निकट सकीतरा में बाबा मुबलदास की जमीन पर कालोनी का निर्माण किया गया था। इस कालोनी को लेकर कई बार शिकायत हुई। स्थानीय स्तर पर कोई परिणाम सामने न आने पर पिछले साल गोवर्धन निवासी नंदकिशोर शर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसमें कालोनी के निर्माण के दौरान नगर पंचायत से नक्शा की स्वीकृति, बोर्ड प्रस्ताव और जमा धनराशि की रसीद पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की।
हाईकोर्ट ने 17 नवंबर 2016 को इस मामले में डीएम को एक माह के दौरान जांच करने तदोपरांत जांच रिपोर्ट पर मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष को दो माह के दरम्यान फैसला लेने के आदेश दिए थे। 15 दिसंबर 2016 में तत्कालीन डीएम नितिन बंसल ने तत्कालीन एसडीएम एनपी सिंह से जांच कराते हुए रिपोर्ट विप्रा उपाध्यक्ष को दे दी लेकिन, विप्रा उपाध्यक्ष ने इस पर कोई फैसला नहीं किया।
इसके खिलाफ पिछले माह गोवर्धन निवासी गौर गोपाल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। इसमें डीएम की जांच रिपोर्ट पर विप्रा उपाध्यक्ष द्वारा कार्रवाई न करने की जानकारी दी गई। हाईकोर्ट ने अवमानना से जुड़ी याचिका पर आठ दिसंबर को डीएम और विप्रा उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत पेशी पर तलब किया है।