आगरा। मुहर्रम की दूसरी तारीख पर शुक्रवार को शिया इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर जारी रहा। पुराना इमामबाड़ा गांधी चौक में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना तुराबी ने कहा कि पैगंबर के नवासे हजरत इमाम हुसैन मक्का में हिजरत करने पहुंचे, लेकिन जब उन्हें दुश्मन के इरादों का पता चला तो उन्होंने हज को उमरा में बदल दिया। इसके बाद वह अपने अहले खानदान के साथ करबला की ओर रवाना हुए। करबला पहुंचने पर उन्होंने खेमानश्त की तैयारियां कीं।
करबला के रास्ते में यजीद ने अपने एक सरदार हुर को सैनिक दस्ते के साथ भेजा। इस पर हुर ने हजरत इमाम हुसैन का रास्ता रोक लिया। जब हजरत ने देखा कि हुर के साथ आए हुए काफिले में लोग प्यासे हैं, उनके जानवर भी प्यास से व्याकुल हैं तो उन्होंने अब्बास को हुक्म दिया कि वे हुर के काफिले के लोगों को पानी मुहैया कराएं। अन्य इमामबाड़ों में भी मौलाना ने मजलिसों को खिताब किया।