कोर्ट से समायोजन निरस्त होने एवं शासन से मांग पूरी न हो पाने से आहत शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को गिरफ्तारियां दी। पुलिस ने गिरफ्तारी देने वाले 237 शिक्षामित्रों को हिरासत में लेने के बाद निजी मुचलका भरवाकर रिहा कर दिया।
कोर्ट से समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्र फिर से सहायक अध्यापक बनाने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन शासन शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय देने को तैयार है। मांग पूरी न होने से शिक्षामित्र एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। प्रभुपार्क में धरने के दौरान शिक्षामित्रों ने सहायक अध्यापक बनाए जाने, टीईटी को समाप्त करने आदि की मांग उठाईं। उनका कहना है कि वे अपने हक को लेकर रहेंगे, चाहे कोई भी कुर्बानी देनी पड़े। गिरफ्तारी देने वाले 237 शिक्षामित्रों में 106 महिलाएं थीं। शिक्षामित्र नेता नौकम सिंह, तेजभान सिंह, रीतेश द्विवेदी, सरस्वती वंदना, राजकुमार, अशोक कुमार, अखिलेश, रेखा शाक्य आदि ने गिरफ्तारी दी।
पुलिस प्रशासन रहा सतर्क
कासगंज। शिक्षामित्रों की गिरफ्तारी को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। प्रभुपार्क पर बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया। इसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल रहीं। एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह, सीओ शैलेंद्र लाल, कोतवाली प्रभारी भी मौजूद रहे। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि कुल 237 शिक्षामित्रों की गिरफ्तारी की गई, जिनको निजी मुचलका भरवाकर रिहा कर दिया।
आपस में ही भिड़ गए शिक्षामित्र
कासगंज। शिक्षामित्रों के कई संगठन कार्य कर रहे हैं। सभी में श्रेय लेने की होड़ लगी है। दिल्ली में आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय करते समय शिक्षामित्रों के नेताओं में आपस में तकरार हो गई। इसके बाद अन्य शिक्षामित्रों में रोष व्यक्त करते हुए नेताओं के राजनीति करने पर नाराजगी जताई। काफी शिक्षा मित्र मौके से उठकर भी चले गए।