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शिक्षामित्रों ने एक दिन बाद धरना स्थगित किया

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आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शिक्षामित्र संगठन की सफल वार्ता के बाद मंगलवार को ही प्रदेशस्तर पर आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी गई थी। हालांकि जिले में एक दिन बाद आंदोलन स्थगित किया गया। प्रतिदिन की तरह बुधवार सुबह भी शिक्षामित्र डायट परिसर में एकत्रित हुए। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेशस्तर पर हुई वार्ता की जानकारी दी। जिसके बाद आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
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उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छौंकर ने कहा कि शिक्षा मित्र समान कार्य, समान वेतन की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अभी शिक्षामित्रों से समय मांगा गया है। अगर शिक्षामित्रों के हित में फैसला नहीं होता तो आंदोलन जारी रहेगा और नई ऊर्जा से अपनी मांग रखेंगे।

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने शिक्षा मित्राें को अपने सेवारत विद्यालय में जाकर शिक्षण कार्य करने की अपील की। धरना प्रदर्शन में रवि त्यागी, एनडी उपाध्याय, सीपी तोमर, पूरन वर्मा, शिशुपाल चाहर, नीलम रघुवंशी, खजान सिंह इंदौलिया, रामप्रकाश लवानियां, हरीश तेंगुरिया, अरविंद तोमर आदि मौजूद रहे।
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शिक्षा मित्रों को कई माह से नहीं मिला मानदेय
असमायोजित शिक्षा मित्रों को कई माह से मानदेय नहीं मिला है। समायोजित शिक्षकों को जून से वेतन नहीं मिला है। बुधवार को शिक्षामित्राें ने बीएसए अर्चना गुप्ता को धरना स्थल पर ज्ञापन दिया। बीएसए स्थानीय समस्याआें के समाधान का आश्वासन दिया।

ये मांगे रखीं
-असमायोजित शिक्षा मित्राें का मार्च, अप्रैल, मई, जून के मानदेय का भुगतान कराया जाए। जुलाई माह के बिल बनवाकर जल्द मंगाए जाएं।
-समायोजित शिक्षकों का जून और जुलाई माह का वेतन सातवें वेतन आयोग के हिसाब से जल्द भुगतान कराया जाए।
-समायोजित शिक्षकाें का अवशष एरियर और बोनस, बढ़े हुए डीए का भुगतान कराया जाए।

किसी कीमत पर धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छौंकर ने सहारनपुर में शिक्षामित्रों की ओर से दिए गए धर्म परिवर्तन के बयान का खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह संगठन का आधिकारिक बयान नहीं है। न ही प्रदेश के किसी पदाधिकारी का है। हम शिक्षक रहें या न रहें, किसी भी कीमत पर धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे। न ही प्रदेश संगठन किसी को ऐसा करने के लिए बाध्य करेगा। ये निजी बयान कुछ शिक्षामित्रों ने निराशा में दिया है।
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