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जिला अस्पताल में आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं

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फिरोजाबाद। लखनऊ के केजीएमवी अस्पताल में बिजली के शार्ट सर्किट से लगी आग में पांच मरीजों की मौत की घटना से सबक लेना होगा। यहां जिला अस्पताल में भी आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। कई जगह पर बिजली के तार खुले पडे़ हैं। अग्निशमन यंत्र कुछ कक्षों में लगे हैं लेकिन स्वास्थ्यकर्मी इनका प्रयोग करना नहीं जानते।
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जिला अस्पताल में औसत करीब सौ से अधिक मरीजों की भर्ती होने के साथ ही तीमारदारों का हर वक्त आना जाना रहता है। ऐसे में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी खुलने के समय तक मरीज और उनके तीमारदारों की संख्या दो हजार का आंकड़ा पार कर जाती है। सोमवार को अमर उजाला की टीम जिला अस्पताल पहुंची।

एसी के बाहर लटकते तार दिखाई दिए। यही तार हादसे का कारण बन सकते हैं। इन्हीं तारों से एक बार बर्न वार्ड की एसी में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई थी। इसके बाद भी तारों को ठीक नहीं किया गया।
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यहां भी तार लटकते दिखाई दिए। वहीं, वृद्धजन वार्ड के अंदर एक कमरे में चल रही रसोई का भी बिजली तार लटके नजर आए। इनसे कभी भी कोई हादसा हो सकता है।

यहां की भी स्थिति गंभीर है। इन दोनों अस्पतालों में न तो आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन यंत्र नजर आए और न ही बालू की बाल्टियां। जबकि टीबी अस्पताल में कई स्थानों पर खुले और लटके हुए तार दिखाई दिए।

वृद्धजन ओपीडी में जहां मरीजों को भर्ती करने के लिए दस बेड का वार्ड है। वहीं वार्ड से पांच कदम की दूरी पर अस्पताल की रसोई है। इसमें एलपीजी से कर्मचारियों द्वारा मरीजों के लिए खाना बनाया जाता है। आग से निपटने के लिए यहां पर कोई साधन नहीं है। मरीज जान बचाकर भाग भी नहीं सकते।

जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल में अगिभनशमन यंत्र लगे हैं। लेकिन उनका प्रयोग करना कोई कर्मचारी नहीं जानते। कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब पढ़ते थे। तब मॉकड्रिल के दौरान चलाया था। इस बात को करीब दस वर्ष का समय बीत गया। यदि अब कोई हादसा हो जाए तो वह इसको नहीं चला सकते। इसको चलाने के लिए कभी भी कोई प्रेक्टिस भी नहीं कराई गई। यहीं हाल जिला अस्पताल का है।

सीएमएस डा. अजय अग्रवाल कहते हैं कि कर्मचारियों को समय-समय पर अगिभनशमन यंत्र चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। वार्ड संख्या चार और पांच में सभी व्यवस्थाएं हैं। पांच हजार लीटर का एक टैंक भी है। इसमें हर वक्त पानी रहता है। सौ शैया अस्पताल की तरफ भी एक टैंक बनवा दिया गया है। इसलिए अस्पताल परिसर में न तो पानी की दिक्कत है और न ही किसी तरह के संसाधनों का अभाव।
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