एटा। पचास की उम्र पार कर चुके राज्य कर्मचारियों की नौकरी स्क्रीनिंग टेस्ट पास करने पर टिकी है। टेस्ट में फेल होने पर इन कर्मचारियों को सरकार रिटायरमेंट देकर घर भेज देगी। मुख्य सचिव ने स्क्रीनिंग 31 जुलाई तक पूरी किए जाने के आदेश दिए हैं। ऐसे में नौकरी जाने के डर से राज्य कर्मचारी भयभीत हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने 50 की उम्र पार कर चुके राज्य कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कराने और अक्षम होने पर कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्य सचिव राजीव कुमार द्वारा जारी आदेश में राज्य कर्मचारियों की 31 जुलाई का स्क्रीनिंग कराने और फेल कर्मियों को अनिवार्य रुप से रिटायरमेंट देने को कहा गया है। डीएम अमित किशोर का कहना है कि राज्य कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कराने को लेकर अभी गाइड लाइन नहीं आई है। गाइड लाइन आने पर पता चलेगा कि कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कैसे कराई जानी है। वहीं स्क्रीनिंग के बाद नौकरी जाने के डर से कर्मियों के होश उड़ गए हैं। ज्यादातर कर्मी और कर्मचारी संघ नेता सरकार के फैसले का दबी जुबान से विरोध कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को अपना आदेश वापस लेना चाहिए। किसी भी कर्मचारी को जबरन रिटायरमेंट देना अनैतिक है। आदेश वापस नहीं हुआ तो कर्मचारियों के साथ रणनीति बना कर आंदोलन किया जाएगा।
सुशील श्रीवास्तव
मिनिस्ट्रियल कलक्ट्रेट कर्मचारी
संघ एटा।
औसत आयु 70 वर्ष है और सरकारी नौकरी में आने के लिए 40 वर्ष है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को 50 के बाद रिटायरमेंट दे दिया जाएगा तो उसका और उसके परिवार एवं बच्चों का भविष्य क्या होगा।
गोपी चंद्र भाष्कर
सचिव
प्रमोटेड पावर इंजीनियर्स
वेलफेयर एसोसिएशन एटा
प्रदेश सरकार के इस फैसले का विरोध किया जाएगा। प्रांतीय नेताओं के साथ बैठक कर जबरन रिटायमेंट के मुद्दे पर रणनीति बना कर आंदोलन किया जाएगा।
चंद्रपाल सिंह यादव
अध्यक्ष लेखपाल संघ एटा
योगी सरकार के फैसले का समर्थन नहीं किया जा सकता है। कर्मचारियों में स्क्रीनिंग टेस्ट के बहाने जबरन रिटायरमेंट देने के फैसले से कर्मचारियों में रोष है।
महेश कुमार यादव
मिनिस्ट्रियल कलक्ट्रेट कर्मचारी
संघ एटा।