एटा। स्ववित्त पोषित संस्थाएं शिक्षार्थी-अभिभावकों की प्राथमिकता बनी हैं। जिले के दो तिहाई से अधिक छात्र-छात्राएं इन्हीं संस्थाओं में पंजीकृत हैं। इस वर्ष भी 77 प्रतिशत बोर्ड परीक्षार्थी इन्हीं संस्थाओं के रहे हैं।
करोंड़ों के खर्च के बाद भी अभिभावकों का विश्वास सरकारी-सहायता प्राप्त संस्थाओं पर नहीं बढ़ रहा है। नि:शुल्क शिक्षा एवं शासकीय योजनाएं भी इन्हें आकर्षित नहीं कर पा रही हैं।
जिले की 80 प्रतिशत विद्यार्थी निजी विद्यालयों पर भरोसा दिखा रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा की बात करें तो कक्षा छह से बारह तक के 80 प्रतिशत छात्र-छात्राएं स्ववित्त पोषित संस्थाओं में पंजीकृत हैं।
2.12 लाख माध्यमिक विद्यार्थियों में 1.70 लाख से अधिक निजी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इतना ही नहीं 77 प्रतिशत बोर्ड परीक्षार्थी भी स्ववित्तपोषित विद्यालयों के ही हैं।
बताते चलें कि बोर्ड परीक्षा के 69398 आवेदकों में राजकीय विद्यालयों के मात्र 1521 एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के मात्र 15119 आवेदक थे। जबकि 52758 परीक्षार्थी वित्तविहीन संस्थाओं के हैं। केंद्रीय बोर्ड में शामिल हुए 95 प्रतिशत परीक्षार्थी भी निजी विद्यालयों के ही हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में राजकीय 18, एडेड 54 एवं 475 वित्तविहीन संस्थाएं संचालित हैं।