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छापेमारी से खानापूरी, कार्रवाई में नोटिस की औपचारिकता

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एटा। जिले में झोलाछापों के इलाज से हर वर्ष कई लोग अपनी जान गवां देते हैं। इसे देखते हुए प्रति वर्ष इन पर लगाम कसने का ढिंढोरा भी पीटा जाता है। प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी में टीम इन झोलाछापों के यहां छापेमारी करती है। इनको नोटिस दिए जाते हैं और कड़ी कार्रवाई की बात कही जाती है।
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अब पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह छापेमारी महज खानापूरी और इन्हें दिए गए नोटिस कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता मात्र ही लगते हैं। गत वर्ष 52 झोलाछापों को नोटिस दिए गए थे जबकि 12 के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।

झोलाछापों के खिलाफ हर वर्ष कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन झोलाछापों की दुकानें कभी बंद नहीं होतीं। वर्ष 2018 में 200 के करीब झोलाछापों के यहां प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे थे। लेकिन नोटिस सिर्फ 52 झोलाछापों को जारी किए गए।
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उसमें से भी मुकदमा सिर्फ 12 झोलाछापों के खिलाफ कराया गया। सबसे बड़ी बात यह रही है कि जिन झोलाछापों को नोटिस दिए गए वह आज भी अपनी दुकानें खोलकर बैठे हैं। जो 12 एफआईआर कराई गई हैं उनमें चार डा. चंद्रशेखर शर्मा, एक डा. अभिनव दुबे और सात डा. आरएन गुप्ता द्वारा कराई गई हैं।

इनके खिलाफ हो चुकी है एफआईआर
झोलाछाप पर कार्रवाई के दौरान हुई एफआईआर में जलेसर एमएच खान, वीरेन्द्र सलीम, अमित किशोर, हरीबाबू शर्मा, पीके विश्वास, कस्बा निधौली कलां के एसके विश्वास, कस्बा अवागढ में पीके विश्वास, जिला मुख्यालय पर शशि पत्नी हरवेश निवासी आशीष कांपलेक्स, अनीता राजपूत निवासी सेंट पॉल्स के पास निधौली रोड, ललित पांडेय निधौली रोड, वंदना जवाहर लाल नेहरू डिग्री कालेज के पास और गजराज सिंह निवासी वसुंधरा शामिल हैं।

नोडल अधिकारी झोलाछाप डा. आर एन गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष जिन झोलाछापों के यहां छापे मारे गए थे, उनमें से 52 को नोटिस जारी किया गया और 12 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई उनके पास किसी न किसी पद्धति की डिग्री पाई गई, जिस कारण से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
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झोलाछाप पहले भी ले चुके है जान
गत वर्षों में जिले के अलग अलग कस्बों 15 से अधिक महिला पुरुष तथा बच्चे अपनी अपनी जान गवां चुके हैं।
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