मैनपुरी। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी की दिल्ली के एम्स में मौत के बाद परिजनों ने जेल परिसर में जमकर हंगामा किया। जेल प्रशासन पर पीट-पीट कर हत्या का आरोप लगाया। मृतक करीब एक माह पूर्व मादक पदार्थ के साथ पकड़े जाने के बाद जेल भेजा गया था। हंगामे की सूचना पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने मृतक के परिजनों को समझा बुझाकर शांत किया।
कोतवाली क्षेत्र के आगरा रोड पर गिहार कालोनी निवासी 25 वर्षीय सोनू गिहार को पुलिस ने 15 जून को एनडीपीएस के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गुुरुवार की शाम सोनू की तबियत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से उसे सैफई के लिए रेफर कर दिया गया। वहां भी चिकित्सकों ने उसकी हालत नाजुक बताते हुए आगरा रेफर कर दिया। देर रात आगरा से भी उसे नई दिल्ली एम्स भेज दिया गया। एम्स में सोनू की मौत हो गई। जानकारी मिलने के बाद परिजन आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन वहां सोनू नहीं मिला। इसके बाद परिजन वापस आ गए।
शुक्रवार की सुबह जिला कारागार के बाहर नारेबाजी और प्रदर्शन कर जेल प्रशासन पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने का आरोप लगाया। सूचना मिलने के बाद एसडीएम अशोक कुमार और सीओ राकेश पांडेय पहुंच गए। मृतक के परिजनों को समझाया। इसके बाद परिजन शांत हुए, लेकिन जिला कारागार के बाहर ही डेरा जमाए रहे। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने हत्या करने के बाद शव को जिला कारागार में रखा है। वह शव को बाहर निकलवाने की मांग कर रहे थे। अधिकारियों के समझाने के बाद परिजन मान गए।
मैनपुरी। बंदी सोनू की मौत के मामले में जेल प्रशासन रैबीज से मौत होने की बात कह रहा है। जेल प्रशासन के मुताबिक कुत्ता काटने के बाद उसे जेल में लाया गया था। हालत बिगड़ने पर हर संभव इलाज कराया गया। सैफई से लेकर एम्स तक ले जाकर जान बचाने की कोशिश की गई, लेकिन बंदी की जान नहीं बच सकी। संभवत: कुत्ता काटने के बाद परिजनों ने लापरवाही बरतते हुए उसका उपचार नहीं कराया। शायद यही वजह उसकी मौत का कारण बन गई। हालांकि परिजन जेल प्रशासन के दावे के उलट हत्या किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।
मैनपुरी। जेल में अब तक कई बंदियों के मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकतर बेहतर उपचार न मिलने, गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की वजह से जान गवा देते हैं। जेल अस्पताल में समुचित उपचार की व्यवस्था न होने के चलते बंदियों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। वहीं छोटी बीमारी भी जेल में रहते हुए जानलेवा बीमारी बन जाती है। बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर कोई ध्यान नहीं देता। अधिकतर बंदियों की मौत सेप्टिक सीनिया से होना जेल अस्पताल की लापरवाह व्यवस्था को दर्शाता है।
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बंदी सोनू को जेल में आने से पहले कुत्ते ने काटा था। उसकी तबियत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के आरोप निराधार हैं। शव दिल्ली से आने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
शिवदास, जेलर