फिरोजाबाद। शहर से लेकर देहात क्षेत्र में नशीली दवाओं की कालाबाजारी का धंधा तेजी से फल फूल रहा है। इन दिनों दर्द निवारक नीला कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सीवान और इंजेक्शन फोर्टविन थोक से लेकर खुदरा बाजार में कई गुना अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। अफसोस तो इस बात से है कि ये दवाएं मरीजों को भी महंगी खरीदनी पड़ रहीं हैं। इसे रोकने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं लग रहा।
नशाखोरी के चक्कर में मरीजों दोगुने दाम चुका रहे हैं। नशे के बाजार में इन दिनों स्पास्मो प्रोक्सीवान और फोर्टविन की जबरदस्त मांग है। कहने को ये कैप्सूल और इंजेक्शन दर्द निवारक है, लेकिन इनका इस्तेमाल नशे में होता हैं। लिहाजा मेडिकल स्टोर संचालक इसका पूरा फायदा उठाते हैं। दवा विक्रेताओं के मुताबिक स्पास्मो प्रोक्सीवान के आठ कैप्सूल का पत्ते की थोक कीमत 31.66 रुपये है। 18 पत्तों के डिब्बा 570 रुपये कीमत है।
मगर मांग बढ़ने पर शहर में यह डिब्बा 1200 रुपये में बिकता है। दवा विक्रेता भी इस पर 20 से 40 प्रतिशत मुनाफा कमाना नहीं छोड़ते हैं। जबकि एमआरपी 48 रुपये है। इसी तरह फोर्टविन के 12 इंजेक्शन के पत्ते की थोक कीमत 52 रुपये है। मगर, 60 इंजेक्शन का पैकेट 260 रुपये के बजाय 700 रुपये तक विकता है। जबकि 12 इंजेक्शन की एमआरपी 66 रुपये ही है। इसके अलावा सीरप फेंसाड्रिल और कांपोज जैसी दवाओं में भी मारामारी होती है।