एटा। 18 वर्ष तक सपा में रहने वाले हरनाथ सिंह यादव ने अटल जी की कविता की पंक्तियां दोहराकर सपा से बगावत ही नहीं की वरन एक बार फिर भगवामय होने के संकेत दिए थे। एक माह बाद हुए विधान परिषद चुनाव में इसका असर भी दिखाई दिया जब हरनाथ यादव ने पार्टी के निर्देश को चुनौती देते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इतना ही नहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी इनका पूरा चुनाव प्रचार संघ संस्कृति पर आधारित रहा।
प्रचार में हेंडबिल, बैनर, पोस्टर से लेकर होर्डिंग तक में केसरियां रंग ही नहीं अटल जी की पंक्तियां भी दिखाई दी। भाजपा नेता सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता का कहना है कि भाजपा से बाय बाय कहने के बाद भी यादव संघ संस्कृति से दूर नहीं हो सके। अपने चुनावी संबोधन में भी कहा था कि वे पार्टी से दूर हुए हैं संघ संस्कारों से नहीं। यही नहीं धूम्रपान नशे के धुर विरोधी हरनाथ सिंह यादव ने संस्कारों से समझौता नहीं किया। नशेड़ी कार्यकर्ता समर्थक भी इनके पास जाने से कतराते थे।
आगे नहीं, पीछे नहीं, ऊपर नहीं, नीचे नहीं सिर्फ बच्चू बाबू
ऐन वक्त पर टिकट कटने से आहत हरनाथ सिंह यादव ने 1996 में भाजपा छोड़ दी और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एमएलसी का चुनाव लड़ा। बताते चलें कि 9 अप्रैल 1996 को स्थानीय रामलीला मैदान में आयोजित भाजपा की सभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इशारों-इशारों में आगरा के बच्चू बाबू के समर्थन का ऐलान करते हुए कहा था आगे नहीं, पीछे नहीं, ऊपर नहीं, नीचे नहीं सिर्फ बच्चू बाबू उर्फ सुरेश चंद्र गुप्ता।
इस ऐलान के समय मंच पर अटल बिहारी बाजपेई और डॉ मुरली मनोहर जोशी भी मौजूद थे। इसी वर्ष सितंबर में हुए चुनाव में आगरा के सुरेश गुप्ता को प्रत्याशी बनाने पर आहत हरनाथ सिंह ने भाजपा को बाय बाय कहते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। 2002 का चुनाव सपा प्रत्याशी के रूप में लड़ा और फिर जीते।