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मोबाइल डाटा और मोबाइल कॉ लंग खंगाल रही एसआईटी

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पुलिस की दबिश से दहशत - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। सांप्रदायिक हिंसा और हत्या के मामले में एसआईटी की टीम का जांच तेज हो गई है। एक ओर एसआईटी वायरल वीडियो के आधार पर जांच कर रही है तो अब एसआईटी जेल में बंद आरोपियों और संदिग्धों के मोबाइल डाटा और मोबाइल की कॉल डिटेल की भी समीक्षा कर रही है। हिंसा से आरोपियों के कनेक्शन को देखा जा रहा है। कॉल डिटेल से पर्दे के पीछे से हिंसा को उकसावा देने वाले भी बेनकाब किए जाएंगे।
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गौरतलब है कि 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा को लेकर शहर में हत्या और हिंसा की घटना को 20 दिन का समय हो चुका है। मामले में अब तक 54 आरोपी जेल जा चुके हैं। छह आरोपी अभी भी फरार हैं। हिंसा से जुड़े कुल 18 मामले दर्ज हैं। इनमें से 10 मामलों की विवेचना एसआईटी कर रही है। प्रारंभिक तौर पर एसआईटी ने वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज को जांच का आधार बनाया था।

इसके आधार पर कुछ आरोपी चिह्नित किए गए। इनकी शिनाख्त की जा रही है। इसके अलावा एसआईटी ने जेल में बंद आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगालनी शुरू कर दी है। इससे हिंसा के कनेक्शन से जुड़े अन्य आरोपियों तक पुलिस पहुंच सके। सर्विलांस टीम मोबाइल कॉल डिटेल की समीक्षा कर रही है। एसआईटी प्रभारी एवं मामलों के विवेचक एक-एक सूचना की समीक्षा गंभीरता से कर रहे हैं।
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हर स्तर से पुख्ता साक्ष्य और प्रमाण एसआईटी द्वारा संग्रहित किए जा रहे हैं, जिससे हिंसा के चिह्नित आरोपियों को सजा मिल सके। संदिग्धों के नंबर भी पुलिस ने हासिल कर लिए हैं। फेसबुक और ट्विटर एकाउंट की भी पड़ताल की जा रही है। उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। एसआईटी के प्रभारी जांच अधिकारी एव एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल के माध्यम से भी महत्वपूर्ण हिंसा से जुड़ी जानकारियां भी हासिल हो सकतीं हैं। उन्होंने बताया कि जांच तेजी से जारी है। हर तरह के साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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