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सूख रही धरती की कोख

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earth - फोटो : Amar Ujala
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एटा। अंधाधुंध दोहन से धरती की कोख सूखती जा रही है। भूगर्भ से जल का भंडार खत्म हो चला है। आलम यह है कि जिले में जलस्तर में 85 फीसदी तक गिरावट आ गई है। वहीं जनपद के तीन ब्लॉक डार्क जोन और क्रिटिकल जोन की स्थिति में हैं। यदि अभी भी वर्षा जल संग्रहण के उपायों पर गौर नहीं किया गया तो भावी पीढ़ी के लिए भूगर्भ जल बस सपना बनकर रह जाएगा।
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विगत वर्षों में बेइंतहा भूजल दोहन के चलते सभी ब्लॉकों में जल स्तर काफी गिर गया है। वहीं बरसात कम होने से भूगर्भ जल की स्थिति का संतुलन बिगड़ा है। साल 2014 से औसत बारिश आधे पर आकर टिक गई है और जमकर हो रहे दोहन ने भूगर्भ जल का हाल और अधिक बिगाड़ दिया है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में भूगर्भ जल का दोहन 88.29 फीसद तक हुआ है। सबसे ज्यादा खराब हालात जलेसर विकास खंड के है।

यहां जलस्तर 12 मीटर तक गिर चुका है। वहीं मारहरा और निधौलीकलां ब्लॉक भी क्रिटिकल की स्थिति में है। ऐसे में भूगर्भ का गिरता स्तर चिंता की बात है। अगर अभी इस बारे में नहीं सोचा गया, तो भविष्य में बुरे परिणाम सामने आएंगे।
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औसत भूजल (मीटर में)
क्षेत्र 2015 2016 2017
एटा सिटी 8.07 8.08 8.10
जैथरा 6.64 7.03 7.08
जलेसर 11.08 13.50 15.00
मारहरा 7.17 08.15 08.75
निधौली कलां 9.06 10.09 11.01
शीतलपुर 7.26 8.15 8.30
अवागढ़ 8.07 8.08 10.01
सकीट 6.00 6.97 7.01



- बोरिंग
- पक्के रास्तों का निर्माण
- पेड़ों का अंधाधुंध कटान
- जल को व्यर्थ बहाना
- बारिश का कम मात्रा में होना
- वर्षा जल का संग्रहण नहीं होना
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