एटा। हाईकोर्ट के नवंबर में निकाय चुनाव कराने के आदेश के बाद राजनीतिक दलों में सक्रियता बढ़ गई है। जिले की चार नगर पालिकाओं और पांच नगर पंचायतों मेें टिकट के दावेदारों की कतार लंबी हो चली है। टिकट को लेकर भाजपा और सपा में सबसे ज्यादा खींचतान है। वहीं बसपा भी पहली बार अपने चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुकी है। निकाय चुनाव को देखते हुए हर राजनीतिक दल अपने-अपने गणित लगा रहा है। दलों को परिसीमन के बाद आरक्षण तय होने का इंतजार है।
भाजपा की नजर नए चेहरों पर
केंद्र और प्रदेश में सरकार बनाने के बाद भाजपा की नजरें अब निकाय चुनाव पर हैं। माना जा रहा है कि पार्टी की नजर चुनाव में नए चेहरों पर है। भाजपा जिला अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने बताया कि आरक्षण तय होने के बाद हाईकमान के आदेश पर टिकट वितरण होगा। पिछले चुनाव में चार सामान्य सीटें थी, बाकी आरक्षित थीं।
वापसी के लिए मंत्र फूंक रही सपा
विधानसभा चुनाव मे मिली करारी हार के बाद सपा निकाय चुनाव को लेकर खुद को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी ने हर नगर निकाय के संभावित दावेदारों के आवेदन भी मांगे हैं। वहीं विस चुनाव की तरह कांग्रेस के गठबंधन को लेकर भी असमंजस बरकरार है। पार्टी जिलाध्यक्ष अशरफ हुसैन का कहना है कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। आरक्षण तय होने के बाद स्थिति साफ होगी।
अपने सिंबल पर चुनाव लड़ेगी बसपा
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त खा चुकी बसपा इस बार निकाय चुनाव में प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। बसपा ने पिछले पंचायत और निकाय चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारे थे, लेकिन इस बार पार्टी निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ेगी। बसपा जिलाध्यक्ष बलवीर भास्कर ने कहा कि सिंबल पर निकाय चुनाव लड़ाने का फैसला हुआ है। वार्ड इकाइयों का गठन कर पार्टी से चुनाव लड़ने वालों से आवेदन मांगे जाएंगे। साफ छवि वाले आवेदकों को पार्टी टिकट देगी।
कांग्रेस में एकला चलो की मांग
कांग्रेस पार्टी में भी निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां चल रही हैं। पार्टी मे एकला चलो की आवाज उठ रही है। कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष चोब सिंह बघेल ने कहा पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के बाद निकाय चुनाव पर फैसला होगा।