मथुरा। जवाहर बाग को लेकर अफसरों के बीच भी तालमेल नहीं था। जब जवाहर बाग को खाली कराने के लिए योजना बन रही थी तब कई अफसरों ने किनारा कर लिया था। 2 जून, 2016 को जब एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी जवाहर बाग खाली कराने पहुंचे थे तब कई अफसर तो समय से पहुंच भी नहीं पाए थे। सीबीआई ने पूछताछ शुरू की तो इसका खुलासा हो रहा है।
मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून, 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 100 से भी ज्यादा घायल हो गए थे। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई के आला अधिकारी पिछले तीन दिनों से मथुरा में डेरा डाले हुए हैं। बयान देने के लिए तत्कालीन एडीएम, सीओ, एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, इंस्पेक्टर और दरोगा बुलाए गए थे। इन सभी को जवाहर बाग में ले जाकर घटनाक्रम की जानकारी ली गई।
अफसरों से पूछा गया कि दो जून को जब एसपी सिटी जवाहरबाग पहुंचे थे तब वह लोग कहां थे। इनमें से कई ने तो यहां तक कहा है कि वह बाद में पहुंचे थे। उन लोगों को नहीं बताया गया था कि जवाहर बाग खाली कराने के लिए जा रहे हैं। इससे साफ है कि इतने बड़े आपरेशन में भी अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं था।
अंतिम पड़ाव पर पहुंची सीबीआई जांच
जवाहर बाग हिंसा की जांच अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बयान ले लिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि इसी माह अदालत में जांच रिपोर्ट दाखिल कर ली जाएगी।
इन लोगों के हो चुके बयान
एसएसपी, डीएम, एडीएम, एसडीएम, सीओ, इंस्पेक्टर, दरोगा और उद्यान विभाग के अधिकारी।