कासगंज। जिले में बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने में निजी स्कूलों के संचालक खेल कर रहे हैं। 72 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक आरटीई पोर्टल पर मैपिंग नहीं कराई है। पहले चरण के आवेदन की प्रक्रिया 20 जनवरी से शुरू हो चुकी है। पोर्टल पर स्कूलों का नाम शो नहीं होने से इन स्कूलों के लिए अभिभावक आवेदन नहीं कर पा रहे।शासन से निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना देखने वाले गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। इसके तहत शासन से 25 प्रतिशत सीटें गरीब पृष्ठभूमि के बच्चाें के लिए आरक्षित की गई हैं। बच्चों को पढ़ाने के बदले स्कूलों को धनराशि भी शासन से दी जाती है। वहीं बच्चे के लिए भी यूनीफार्म, कापी, किताब, स्टेशनरी आदि का खर्च भी दिया जाता है। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्कूलों को आरटीई पोर्टल पर मैपिंग करनी होती है, जिससे आवेदन करने वाले अभिभावक स्कूल का चयन कर सकें, लेकिन जिले के तमाम ऐसे स्कूल हैं जिन्होंने अब तक इसमें रुचि नहीं दिखाई है। जिले में 581 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों को जनवरी के पहले पखवाड़े तक मैपिंग करनी थी, 79 स्कूलों ने अपनी मैपिंग नहीं कराई। इसके बाद इन स्कूलों को 18 जनवरी तक का समय दिया गया ताकि 20 जनवरी से शुरू होने वाली आवेदन प्रक्रिया में इन स्कूलों का नाम भी प्रदर्शित हो सके, लेकिन 72 स्कूलों ने इसके बाद भी मैपिंग नहीं कराई। आवेदन प्रक्रिया को शुरू हुए 10 दिन का समय हो चुका है, लेकिन स्कूल अभी तक मैपिंग नहीं करा रहे।