कासगंज। एसबीआई के ग्राहक सेवा केंद्र गोरहा में धोखाधड़ी सामने आने से पूरा बैंकिंग सिस्टम कटघरे में है। इस पेचीदी जांच के लिए जिलाधिकारी ने अग्रणी बैंक प्रबंधक को टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं। टीम पूरे मामले की जांच करेगी।
ग्राहकों के खाते से कितनी राशि का गबन हुआ है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन बड़ी राशि का घोटाला होने के संकेत मिल रहे हैं। अभी तक 40 से 50 लाख रुपये तक की धोखाधड़ी के शिकार लोगों के खातों का ब्योरा ही सामने आया है। ग्राहक सेवा केंद्र संचालक अर्जुन ने सुनियोजित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया। इससे बैंकिंग प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राहकों के खाते आधारकार्ड से खुले और आधारकार्ड थम्ब प्रिंट से लिंक है, फिर केंद्र संचालक ने कैसे जालसाजी कर खातों से राशि निकाली। यह तकनीकि जांच का पहलू है। पहले से ही खाताधारकों की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची, लेकिन गंभीरता से नहीं लिया और न ही ग्राहक सेवा केंद्र की यूजर आईडी बंद की गई। 10 दिन पहले तक केंद्र संचालक ने खातों से राशि निकाली।
लुहर्रा के सुरेश, नगला हीरा के नाथूराम के अलावा तमाम किसान ऐसे हैं, जिनके खाते में आई किसान सम्मान निधि की राशि संचालक ने निकाल ली। केंद्र पर करीब 2000 से अधिक खाते हैं। डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने जांच कमेटी बनाने के निर्देश दिए है। एडीएम योगेंद्र कुमार ने एलडीएम को निर्देशित कर ग्राहक सेवा केंद्र के अलावा बैंकिंग सिस्टम को भी जांच में शामिल करने को कहा है।
इनके खातों में भी गड़बड़ी
ब्रह्मपुरी के रिंकू, लुहर्रा के हरदेव के खाते से 5600 रुपये निकाले गए। नगला हीरा के मूलचंद के खाते से भी सवा लाख रुपये निकाले। डोरई के पुष्पेंद्र और नगला हीरा की प्रेमा देवी के खातों से 12 हजार रुपये निकाल ले गए।
जेब में रुपये, हाथ से एंट्री
घोटालेबाज अर्जुन क्षेत्र के ग्रामीणों की चलती फिरती बैंक था। ग्राहक जब खाते में लेन-देन की एंटी कराने पहुंचते थे तो वह कंप्यूटराइज्ड नहीं, बल्कि रुपये जेब में रखकर पासबुक में हाथ से एंट्री कर देता था।
आंकड़े की नजर से-
- जांच को तीन सदस्यीय टीम गठित होगी।
- 1700 परिवारों के सदस्यों के सेवाकेंद्र में खाते।
- 35 प्रभावित गांव के ग्रामीण अब तक आए सामने।
वर्जन-
- अभी तक किसी ग्राहक ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। घोटाले की जानकारी होने पर एलडीएम के नेतृत्व में जांच समिति बनाई जा रही है। मामले की जांच होगी।
- चंद्र प्रकाश सिंह, डीएम।
- ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि हो सकता है उसने खातों में जमा न कर जेब में रख ली हो। बेहद चिंतनीय और गंभीर मामला यह है कि आखिर खातों से केंद्र संचालक ने धनराशि कैसे निकाल ली। बैंकिंग सिस्टम की जांच होगी।
- महेश प्रकाश, एलडीएम।
- यदि खातों से धनराशि निकली है तो बैंकिंग सिस्टम की मिलीभगत है। कंपनी पुलिस सत्यापन के बाद ही कोई ग्राहक सेवा केंद्र स्वीकृत कराती है, लेकिन उसके संचालन पर बैंक की नजर रहती है।
- विक्रम सिंह, असिस्टेंट मैनेजर, ओरियल कंपनी।