खुले आसमान के नीचे टैंक्टर टाली पर लदा गेहूं।
एटा। क्रय केंद्र पर व्याप्त अव्यवस्थाओं के चलते किसान आढ़त की ओर रुख कर रहा है। इसके चलते आढ़त पर रौनक नजर आ रही है, जबकि क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। दिन में एक दो किसान पहुंचते हैं। अब शासन की ओर से प्रतिदिन 300 क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दे दिया गया है, जिसे पूरा करने में केंद्र प्रभारियों के पसीने छूट रहे हैं।
मंडी समिति में आढ़तियों के यहां किसान अपने गेहूं बिक्री कर रहा है, लेकिन क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। कई क्रय केंद्रों पर कल ही परिवहन और लेबर के ठेकेदार तय हो पाए हैं। इसकी वजह से किसानों को क्रय केन्द्रों से वापस किया जाता है। इतना ही नहीं जब किसान क्रय केंद्र पर जाता है तो उसकी धनराशि देने में आनाकानी की जाती है और धनराशि ट्रांजेक्शन कराने में काफी विलंब किया जाता है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी प्रज्ञा शर्मा का कहना है कि बारिश के बाद गेहूं में नमी हो जाने के चलते किसानों को वापस करने की सूचनाएं जरूर हैं। लेकिन आढ़तियों के यहां किसान गेहूं बिक्री कर रहा है यह उनका अपना निजी मामला है।
बारिश में काला हुआ गेहूं
क्रय केंद्रों व आढ़तियों के यहां आने वाले कुछ किसानों का गेहूं काला भी हो गया है। कुछ दिन पूर्व हुई बारिश के चलते किसान अपना गेहूं कटवा नहीं पाए थे। इसके चलते गेहूं काला पड़ गया। गेहूं की फसल में अधिक नुकसान तो नहीं है लेकिन गेहूं का दाना हल्का हो गया है। इससे तौल में गेहूं कम निकल रहा जबकि एक क्विंटल वाले गेहूं की तौल कम से कम एक क्विंटल दस किलो होनी चाहिए थी। यह कई किसानों की परेशानी दिखाई दी।
1700 रुपये में खरीद रहे आढ़ती
किसान क्रय केंद्रों पर न जाकर आढ़तियों के पास अपना गेहूं बेंच रहे हैं। इसकी जब वजह जानने की कोशिश की गई तो किसानों ने बताया कि आढ़ती नकद भुगतान कर देते हैं जबकि क्रय केंद्रों पर कई नियम कानून कायदे के बाद भी भुगतान जल्द नहीं मिल पाता है। मंडी में अपना गेहूं लेकर आए मलावन के राम गोपाल ने शुक्रवार को 10 क्विंटल गेहूं आढ़त पर बेचा। उन्होंने बताया कि क्रय केंद्र पर पता करने गया था वहां भुगतान तत्काल न मिल पाने की बात कही गई। इसके चलते आढ़त पर गेहूं बेचा हैं। यहां 100 रुपये सस्ता तो बिका लेकिन भुगतान तत्काल हाथ में मिल गया।