एटा। खुले मेें शौच मुक्त घोषित किए जा चुके एटा जिले में स्वच्छ भारत मिशन की पोल खुल गई है। गांव में कागजों पर शौचालयों का निर्माण करा दिया गया, लेकिन जमीन पर एक भी शौचालय नहीं है। ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत कर शौचालय निर्माण कराने की मांग की है।
जिले को प्रशासन 30 अक्तूबर को खुले में शौच मुक्त घोषित कर चुका है। हालांकि तमाम गांवों में आज भी शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका है। सकीट ब्लॉक की ग्राम पंचायत सलेमपुर खेड़िया के गांव बरखेड़ा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 91 शौचालयों का निर्माण किया जाना था। मिशन की रिपोर्ट में गांव में सारे शौचालयों का निर्माण दिखाकर गांव को ओडीएफ कर दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। गांव में अब तक एक भी शौचालय नहीं बन सका है। इससे ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने मंगलवार को ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की शिकायत डीएम से की है।
तीन माह की होती है ओडीएफ सत्यापन की मियाद
गांव अथवा शहर को जिला स्तर पर ओडीएफ किए जाने के बाद मंडलीय सत्यापन के लिए तीन माह का समय दिया जाता है। मंडलीय सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद गांव को पूर्ण ओडीएफ माना जाता है लेकिन जिले को ओडीएफ हुए तीन माह होने जा रहे हैं और बरखेड़ा जैसे तमाम गांवों में शौचालय बने ही नहीं हैं।
गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है। गांव ओडीएफ किया जा चुका है। शौचालय निर्माण के नाम पर बड़ा खेल हो रहा है।
जवर सिंह
गांव में शौचालय निर्माण के तहत कोई काम नहीं हुआ है। ग्रामीण कई बार जिम्मेदारों से शौचालय निर्माण की मांग कर चुके हैं।
राजकिशोर
गांव को फर्जी ओडीएफ घोषित किया गया। साथ ही कोई शौचालय नहीं बनाया गया है।
संतोष
गांव को ओडीएफ दिखाकर अधिकारियों और जिम्मेदारों ने बड़ा खेल किया है। इसकी जांच होनी चाहिए।
सुरेंद्र सिंह
गांव में विकास कार्यों के नाम पर बड़ा खेल हो रहा है। ग्रामीणों के नाम सूची में दिखाकर शौचालय कागजों में शौचालय बना दिए गए।
विक्रम सिंह
लोकायुक्त के निर्देश पर चल रही जांच
ग्राम पंचायत सलेमपुर खेड़िया में लोकायुक्त के निर्देश पर जांच भी चल रही है। डीएम ने मनरेगा और समेत विकास कार्यों के नाम किए गए फर्जीवाड़े की जांच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एक्सईएन आरईएस को सौंपी है। मामले में ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस दिया जा चुका है। वहीं प्रधान से रिकवरी की तैयारी की जा रही है।
ग्राम पंचायत को गलत ओडीएफ किया गया है। तत्कालीन सचिव अनिल उपाध्याय ने कोई काम नहीं किया है। कोई शौचालय नहीं बना है। गांव को ओडीएफ करने के लिए कोई मुझसे पूछने नहीं आया। सब कुछ राजनीतिक कारणों से हो रहा है।
विद्योत्मा देवी, प्रधान
ग्राम प्रधान ने शौचालय बनने नहीं दिए। उन्होंने खाते से कोई पैसा नहीं निकालने दिया। अब मुझे ग्राम पंचायत से हटा दिया गया है।
अनिल उपाध्याय, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव