फिरोजाबाद। अभा सोह्म महामंडल द्वारा आयोजित संत सम्मेलन में पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद ने कहा कि सेवा, पूजा, जप, तप, स्वाध्याय, दान आदि साधनों द्वारा हृदय शुद्ध होता है। शुद्ध अंत:करण से ही जगत का सही सार समझ में आता है।
धर्म सभा में पीठाधीश्वर ने कहा कि बिना वैराग्य के परमात्मा के विषय में जिज्ञासा पैदा नहीं हो पाती है। जब जिज्ञासा होती है तो सद्गुरु की आवश्यकता होती है। सद्गुरु ही जीव को परमात्मा से मिलाने का रास्ता बताता है।
महामंडलेश्वर स्वामी शिव चैतन्य महाराज ने कहा कि संसार में दो प्रकार के मार्ग हैं एक प्रेय एक श्रेय। बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय अर्थात कल्याणकारी मार्ग को चुनता है। जबकि सामान्य व्यक्ति प्रेेय अर्थात मन को प्रिय लगने वाला मार्ग चुनता है।
महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद ने कहा कि जो भी अनुशासित चरित्र पर चलता है, वह जीन की ऊंचाइयों को छूता है। धर्म सभा में स्वामी प्रीतमदास, स्वामी अद्येतानंद, स्वामी ज्ञानांद, स्वामी नारायणानंद, स्वामीप्राज्ञानंद ने संबोधित किया।
कथा व्यास पं. रामगोपाल शास्त्री ने रामजन्म व कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। श्रीकृष्ण के जन्म पर नंद बाबा के यहां खुशियां मनाईं। श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी झांकी के चित्रण दर्शन भी श्रद्धालुओं को कराए। महापौर नूतन राठौर ने पार्षदों के साथ संतों की आरती उतारी।