उत्तर भारत की प्रसिद्ध तीर्थनगरी सोरों में द्वादशी पर आस्था का सैलाब उमड़ा। भीड़ इतनी थी कि तीर्थनगरी में व्यवस्था चरमरा गई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने हरिपदी के घाट पर धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए।
बुधवार को भगवान वराह का मोक्ष दिवस मार्गशीर्ष द्वादशी था। द्वादशी पर्व पर हरिपदी घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही गंगा स्नान के लिए दूर दराज इलाकों से श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने हरिपदी के घाट पर हवन पूजन सहित तमाम धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए। हर हर गंगे के जयकारों से तीर्थनगरी गुंजायमान होते रहे। हजारों श्रद्धालुओं ने मेला ग्राउंड पहुंच मेले का लुत्फ भी उठाया।
नारंगी, खजला बनी पहचान
नारंगी और खजला सोरों मेले की खास पहचान है। इस मेले के अलावा जिले में नारंगी कहीं नहीं मिलती है। मेले में खजला और नारंगी की जमकर खरीदारी की। लोगों ने सोरों के पारंपरिक मेले में जमकर आनंद लिया।
सतर्क रही पुलिस
कासगंज। एकादशी की अपेक्षा द्वादशी पर्व पर सोरों मेले में भीड़ काफी अधिक थी। भीड़ को देखते हुए पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। सुबह से ही मेला ग्राउंड में मेला प्रभारी कोमल सिंह एवं सोरों कस्बे में कोतवाली प्रभारी रिपुदमन सिंह भ्रमण करते रहे। पीएसी बल के जवान भी निगरानी बनाए रहे।
कासगंज में किया डायवर्जन
सोरों में भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सोरों से लेकर कासगंज की सड़कों तक जाम के हालात दिखाई दिए। शहर के सर्कुलर रोड पर जाम से निपटने के लिए पुलिस ने नो एंट्री प्रभावी की। व्यावसायिक वाहनों के अलावा डग्गेमार वाहनों को भी शहर में नहीं घुसने दिया। निगम की बसों को छोड़कर निजी बसें अमांपुर रोड से रूट डायवर्ट कर निकाली गईं।