एटा। पिछली सरकार में जिले में तैनात रहे एएसपी और पूर्व थानाध्यक्ष जैथरा की शिकायत पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने वाले पुलिस अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी ने प्रमुख सचिव गृह को जांच के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने दोनों पुलिस अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, वर्ष 2016 में थाना जैथरा 18 दिन तक बिना स्टाफ के चलने का मामला सामने आया था जिसमें तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने थानाध्यक्ष कैलाश चंद्र दुबे को बचाने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में 18 दिन तक बिना स्टाफ थाना चलने की पुष्टि की थी। मामले की शिकायत जैथरा के आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने सीएम योगी आदित्यनाथ से की। इसके साथ ही कई अन्य शिकायतों से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। मामले में हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने की भी शिकायत की गई थी। मामले में सीएम योगी ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश देते हुए जांच कर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच की संस्तुति करतेे हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन को जांच सौंप दी है। बताते चले कि तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव की वर्तमान में गौंडा तथा थानाध्यक्ष कैलाश चंद्र दुबे कानपुर में तैनात है।
इन मामलों की हुई थी शिकायत
एसओ कैलाश चंद्र दुबे के खिलाफ पदभार ग्रहण करने से पहले मुकदमे की विवेचना शुरू करने और केस डायरी से पर्चा गायब करने की जांच में एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने क्लीन चिट दी। जबकि मौजूदा एएसपी संजय कुमार ने जांच में थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई।
वर्ष 2016 में डकैती के एक मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए जिसमें तत्कालीन सीओ धर्मसिंह मांर्च्छल ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन एसओ ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की। रिपोर्ट देरी से दर्ज होने के मामले की जांच में एएसपी ने जांच रिपोर्ट में लिखा कि आदेश पहुंचने के वक्त थाने का पूरा स्टाफ डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट में बताकर क्लीनचिट दे दी। जबकि 18 दिन बिना स्टाफ थाना चलने की सूचना शासन को नहीं दी गई।
एसओ ने एक घटना में शामिल ट्रैक्टर को बदलकर दूसरा ट्रैक्टर लगा दिया। साथ ही आरोपी की मदद की। मामले की जांच में भी एसओ को बचा लिया गया।
पोक्सो एक्ट में दर्ज एक मुकदमे की सूचना तीन दिन तक एसएसपी और कंट्रोल रूम को नहीं देने के मामले में एसओ के खिलाफ जांच की संस्तुति की गई। इसमें भी एसओ को बचा लिया गया।
पोक्सो एक्ट के एक अन्य मामले में एसओ कैलाश चंद्र दुबे ने तहरीर में नाबालिग और उम्र का खुलासा नहीं किया और एफआईआर न्यायालय को भेज दी।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निर्देश पर एसएसपी के जरिए सौंपी गई जांच में एएसपी ने एसओ को क्लीन चिट देकर झूठी रिपोर्ट शासन को भेज दी।
मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से की जा रही है। अभी तत्कालीन एएसपी और एसओ के बयान होने है। जल्द ही मामले की रिपोर्ट शासन को दी जाएगी।
राजीव कुमार, प्रभारी डिप्टी एसपीज् इंस्पेक्टर भ्रष्टाचार निवारण संगठन, इकाई आगरा