मथुरा। यमुना के खादर में पिछले 10 सालों के दौरान 250 से ज्यादा कालोनियां बस गई हैं। इसमें अधिकांश कालोनियां यमुना से महज चंद मीटर की दूरी पर बसी हैं। वर्तमान में यही कालोनियां यमुना की बाढ़ की चपेट में हैं।
काम की तलाश में गांव छोड़कर शहर में बसने वाले कमजोर तबके के लोगों को छोटे कालोनाइजरों ने सरकारी अफसरों के साथ मिलकर यमुना के खादरों में बसा दिया। कोयला अलीपुर से वृंदावन तक 18 किलोमीटर के दायरे में 250 से ज्यादा कालोनियां बसा दी गई हैं। इस अवैध निर्माण में तहसील से लेकर विकास प्राधिकरण के अफसर की खास सहभागिता रही।
नक्शा की बगैर स्वीकृति के कई हजार मकान तैयार हो गए। नोटिस तो विकास प्राधिकरण के अभियंताओं के स्तर से जारी किए गए, लेकिन ले-देकर मामला रफादफा किया जाता रहा। अभियंताओं की इस कारगुजारी पर बड़े अफसरों ने भी सदैव पर्दा डाला।
बाकी कसर डूडा ने पूरी कर दी। खादर की बनी कालोनियों में सड़क, खड़ंजा बना दिए। वृंदावन में जल निगम ने ऐसी अवैध कालोनियों में सीवर भी डाल दी है। अब खादर में बसी यहीं कालोनियां यमुना का जल स्तर बढ़ते ही बाढ़ की चपेट में आ गई हैं।