एटा। जिले की ग्राम पंचायतों के आडिट में आपत्तियां सामने आने के बाद ग्राम प्रधान और सचिवों में हड़कंप है। ग्राम पंचायतों में बीते वर्षों में किए गए खेल के खुलासे से बचने के लिए ग्राम प्रधान और सचिव आडिट में रुचि नहीं ले रहे हैं। आलम यह है कि ग्राम प्रधान और सचिवों ने ग्राम पंचायतों से अभिलेख गायब कर दिए हैं। ऐसे में 233 ग्राम पंचायतों का आडिट कराया ही नहीं गया है। इसके चलते प्रदेश सरकार की मंशा को पलीता लग रहा है।
पिछले साल प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के खातों और अभिलेखों का आडिट कराने के निर्देश दिए थे। जिले में आडिट की प्रक्रिया शुरू हुई तो बार-बार चेतावनी और निर्देशों के बाद 343 ग्राम पंचायतों ने आडिट कराया, जबकि 233 ग्राम पंचायतों ने आडिट में रुचि नहीं दिखाई। इसकी वजह रही कि ग्राम पंचायतों में बीते वर्षों में ग्राम प्रधान और सचिवों ने जमकर खेल किया है। कई ग्राम पंचायतों के तो अभिलेख ही गायब कर दिए गए हैं। साथ ही लाखों रुपये की सरकारी धनराशि का बंदरबांट हुआ।
आडिट के निर्देश आने के बाद प्रधानों और सचिवों की हालत खराब हो गई थी। खेल का खुलासा होने से बचने के लिए अब तक 233 ग्राम पंचायतों ने आडिट ही नहीं कराया है। ऐसे में साफ है कि इन ग्राम पंचायतों में बड़े खेल हुए हैं। हाल ही में आई आडिट रिपोर्ट में 84 ग्राम पंचायतों में गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। यदि प्रशासन सख्ती से शेष ग्राम पंचायतों के अभिलेखों की जांच कराता है तो बड़े-बड़े घोटालों का भंडाफोड़ होना तय है।