पटियाली की दलित बालिका से सामूहिक दुष्कर्म के मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर डा. रामशंकर कठेरिया ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले की जांच किसी अन्य जिले के डिप्टी एसपी से पुन: विवेचना कराए जाने के लिए डीआईजी अलीगढ़ को निर्देश दिए हैं। साथ ही पटियाली के डिप्टी एसपी के खिलाफ कार्रवाई करने को भी निर्देश दिए हैं।
पिछले वर्ष 23 अक्टूबर को थाना पटियाली में उच्च सेवा आयोग के प्रोफेसर नीरज मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह मामला सामूहिक दुराचार का था, लेकिन पुलिस ने यह मामला केवल छेड़छाड़ की धाराओं में ही दर्ज किया और मामले में नीरज मिश्रा की जगह नाम बदलकर मनीष मिश्रा कर दिया गया। आयोग के चेयरमैन ने कहा कि इस मामले में पीड़िता के साथ पुलिस का रवैया संवेदनहीन रहा। पटियाली के डिप्टी एसपी करमवीर सिंह ने अभियोग में जुर्म का न होना पाए जाने पर अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए मामला खारिज कर दिया और न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी। आयोग के चेयरमैन ने इस मामले की विवेचना किसी गैर जिले की पुलिस से करान को कहा है। साथ ही डिप्टी एसपी करमवीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला झूठा था। हमने पूरे मामले की विवेचना करके फाइनल रिपोर्ट लगाकर न्यायालय में भेजी थी। न्यायालय ने इस रिपोर्ट को स्वीकार भी कर लिया है। पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ऐसी शिकायतें की जा रही हैं।
करमवीर सिंह, पटियाली सीओ