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‘तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूं’

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संतोष आनंद - फोटो : डैमो
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मथुरा। नव वर्ष मेले में हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतकार संतोष आनंद सहित अन्य कवियों की कविताओं, देशभक्ति और व्यंगात्मक काव्य पाठ पर श्रोता झूमते रहे। संतोष आनंद ने फिल्म ‘शोर’ का गीत ‘तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूं, तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूं’ सुनाया।
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डेंपियर नगर स्थित जुबली पार्क में लगे नव वर्ष मेले में रात 11 बजे से शुरू हुए काव्य पाठ में कवि अनिल वाजपेयी ने देश भक्ति पर काव्य पाठ किया। इसमें उन्होंने शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद पर काव्यपाठ किया। कवि डा. उमाशंकर राही और रचना गोस्वामी ने शृंगार और वीर रस की कविता पढ़ी। हाथरस के कवि सबरस मुरसानी ने नेताओं और देश की स्थिति पर व्यंग कसे। उन्होंने ‘नेता के जब हुई संतान, पत्रकार ने पूछा तो बोले नेताजी, यह है फर्जी मतदान’ रचना प्रस्तुत की। पदम सिंह अलबेला ने ‘घंटी बजाता हूं, बुढ़िया चली आती है’ रचना सुनाई।

रमाशंकर पांडेय ने ‘राम यहां आस्था है, राम विश्वास है’ रचना प्रस्तुत की। रूबिया खान ने ‘पाकिस्तान हमारी जागीर, इसकी तस्वीर भी ना देंगे’ रचना प्रस्तुत की। उधर, देर रात तक श्रोता गीतकार संतोष आनंद को सुनने के लिए बैठे रहे। इसमें संतोष आनंद ने फिल्म ‘शोर’ का गीत ‘तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूं, तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूं’ सुनाया। इसके बाद क्रांति फिल्म के गीत ‘जिंदगी की ना टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी’ और गीत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ पर श्रोता झूमते रहे। कवि सम्मेलन का संचालन डा उमाशंकर राही ने किया।
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