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हिंसा आगजनी के 11 आरोपियों की जमानत खारिज

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दुकानें खुली रहीं - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
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शहर में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में जेल में बंद 11 आरोपियों की जमानत जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश त्रिपाठी ने खारिज कर दी। जमानत को लेकर शासकीय अधिवक्ता एवं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच काफी बहस हुई। इस बहस के दौरान न्यायालय कक्ष में तमाम अधिवक्ता व मामले की पैरवी में जुटे लोग भी मौजूद रहे। बहस के पश्चात सायं के समय जमानत खारिज होने का आदेश जिला जज न्यायालय ने जारी किया।
गौरतलब है कि 26 जनवरी एवं 27 जनवरी को शहर में तिरंगा यात्रा के दौरान जमकर सांप्रदायिक हिंसा हुई। इसमें युवक चंदन की मौत हो गई, दो लोग घायल हो गए थे और कई स्थानों पर आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। अलग-अलग 16 अभियोग पंजीकृत हुए। इन आरोपों में अब तक 56 लोग जेल जा चुके हैं।
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बुधवार को आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा के मामले के आरोपों से जुड़े 11 आरोपियों की जमानत प्रार्थना पर सुनवाई होनी थी। पिछले कई दिनों से इन पर सुनवाई टल रही थी। बुधवार को जमानत प्रार्थना पत्र पर जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश गोला ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर बताते हुए जमानत खारिज करने की न्यायालय से मांग की वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने जेल में बंद आरोपियों को गलत तरीके से जेल भेजने की बात करते हुए जमानत देने की मांग उठाई। दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क दिए गए। जिला जज ओपी त्रिपाठी दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सायं के समय फैसला दिया।
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न्यायालय से जारी आदेश के मुताबिक हिंसा और आगजनी के आरोपी विनीत सक्सेना, अनिल कुमार, सचिन कुमार, अनुज तोमर, राज, अमित सक्सेना, गगन, गजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, वीरू एवं दीपक वर्मा के जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिए। जमानत खारिज होने पर आरोपियों के परिवारीजन काफी निराश नजर आए।
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