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खतरनाक मोड़ पर ट्रैफिक नियंत्रण के नहीं इंतजाम

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फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। सिरसागंज के सोथरा चौराहे जैसे हादसे वाले प्वाइंट शिकोहाबाद में कम नहीं। प्रमुख चौराहे पर ओवरब्रिज का निर्माण होने के कारण खतरनाक मोड़ों पर कभी वाहनों के पलटने से यहां हादसा हो सकता है। एनएचआई ने संकेतांक लगाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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सुभाष तिराहा पर ओवरब्रिज का निर्माण लंबे अर्से से चल रहा है। वाहनों को काफी मोड़ के बाद निकलना पड़ रहा है। प्रतापपुर चौराहा, एटा चौराहा के साथ मैनपुरी चौराहे का यही हाल है। सिक्सलेन के तहत निर्माण कार्य होने के कारण ही यहां के मोड़ काफी खतरनाक हो गए हैं। तेज रफ्तार, ओवरलोड वाहन यहां कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। क्योंकि इन चौराहों पर वाहनों की भीड़ के साथ यात्रियों की भीड़ हमेशा रहती है। हाईवे पर ओवरब्रिज का निर्माण कराने वाली कंपनियों ने रूट डायवर्जन के लिए संकेतांक तक नहीं लगाए।

डिवाइडरों के लगा देने के कारण यहां पर तेज रफ्तार वाहनों की गति थमती नहीं। गत माह ट्रक से सिर बाहर निकालने पर फिरोजाबाद के एक युवक की गर्दन धड़ से अलग हो गई थी। इसके अलावा आरौंज की पुलिया, नौशेहरा पुल के पास कट और हरियाली पैट्रोल पंप के पास प्रमुख हादसों के प्वाइंट हैं।
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हादसे के बाद प्राधिकरण की ओर से सिर्फ ब्रेकरों को सफेद कलर में रंगवा दिया है। संकेतांक, साइनबोर्ड नहीं लगाया। उधर एनएचआई के हाईवे पर गति सीमा को नियंत्रित करने को बनाए ब्रेकर समतल हो गए। क्योंकि यहां भारी वाहनों के आवागमन पूरे दिन रहता है। मोड़ पर सड़क उखड़ने के कारण रास्ता काफी मुश्किल भरा हो गया है। संकेतांक के नहीं होने के कारण यहां वाहनों की तेज रफ्तार के चलते तो हादसा होने की संभावना अधिक है।

शिकोहाबाद के प्रमुख चौराहों पर भले ही जाम का झाम घंटों तक बना रहे लेकिन खाकी दिखाई नहीं देती। खुद लोग गाड़ी से उतरकर रास्ते निकालने का प्रयास करते हैं। यह नजारा आए दिन देखने को मिलता है। पुलिस पिकेट चौराहों पर यदि लगी हो तो वह इतनी जहमत उठाना उचित नहीं समझते हैं।
सिक्सलेन का निर्माण करने वाली कंपनियों को प्रतिनिधियों को बुलाकर यह निर्देश दिए जाएंगे कि जिन-जिन चौराहों पर काम चल रहा है वहां ब्रेकर आदि सही ढंग से बनाएं। ताकि वाहनों की रफ्तार कम हो सके। रफ्तार थमेंगी तो फिर हादसा होने की संभावना कम रहेगी।
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