मथुरा। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान मथुरा प्रदेश के 20 जनपदों में लघु सीमांत किसानों के बीच बकरी पालन को प्रोत्साहित करने जा रहा है। इसके अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए 3.40 करोड़ की योजना को शासन ने अनुमति देते हुए पहली किस्त 2.07 लाख जारी कर दी है।
गांव में गरीब और लघु सीमांत किसान की आय को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की योजना को सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 जनपद चयनित किए गए हैं, जहां बकरी पालन में वृद्धि करने की संभावना है। इन जनपदों में मथुरा विवि परिसर में स्थापित होने जा रही बकरी सीमेन प्रोजेक्शन लेबोरेटरी से सीमेन पशुचिकित्सालयों तक पहुंचाया जाएगा। यहां के प्रशिक्षित पशु चिकित्सक बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की सहायता से जमुनापारी और बारबरी प्रजातियों को बढ़ाने का काम करेंगे।
पशुपालन विभाग के साथ शुरू होने जा रही इस योजना के लिए झांसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, फिरोजाबाद, आगरा, एटा, मैनपुरी, मानपुर देहात, औरेया, इटावा, उन्नाव, गोरखपुर, देवरिया, सीतापुर, आजमगढ़, कुशीनगर जनपद का चयन किया गया है। यहां के पशुचिकित्सकों को विश्वविद्यालय के स्तर से कृत्रिम गर्भाधान का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो बाद में इसे संबंधित जनपदों में प्रचलित करेंगे। योजना के समन्वयक डा.मुकुल आनंद ने बताया कि प्रथम चरण में इस योजना में 20 जनपद फिर बाकी जनपदों में काम किया जाएगा। सात साल में इसे प्रदेश भर में प्रभावी बनाना है।