एटा के अलीगंज में तहसील कारगुजारियों को लेकर चर्चा में है। दो दिन पहले जहां फर्जी तरीके से सरकारी जमीन पर कब्जा करने का मामला सामने आया था वहीं अब तहसील से 71 फाइलें गायब पाई गई हैं। इसमें तहसील न्यायालय के पेशकार को जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
तहसीलदार राकेश कुमार ने बताया कि धारा 67 के तहत तहसील में चल रहे मुकदमों की 71 पत्रावलियां गायब पाई गईं हैं। यह पत्रावलियां भूमि संबंधी हैं। मामले की जांच में पाया गया कि पत्रावलियां तहसीलदार न्यायालय से गायब हुई हैं। पेशकार कैलाश नारायण सक्सेना से जवाब मांगा लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। निर्धारित समय सीमा के बाद भी जवाब न दिए जाने पर पेशकार के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू तो यह है कि बीते दिनों पत्रावलियों में छेड़छाड़ कर लाखों रुपये की सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त कर ली गई थी। इसमें तहसीलदार ने नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब तहसीलदार न्यायालय से पत्रावलियां गायब होना विभागीय लापरवाही उजागर कर रहा है।
पेशकार ने तहसीलदार पर ही जड़े आरोप
मामले में पेशकार कैलाश नारायण सक्सेना ने उल्टे तहसीलदार पर ही आरोप जड़ दिए हैं। उनका कहना है कि वह 30 अगस्त से चिकित्सकीय अवकाश पर हैं। जिन पत्रावलियों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है वो गलत है। तहसीलदार राकेश कुमार द्वारा प्राइवेट कर्मचारियों के माध्यम से ये पत्रावलियां गायब कराई गईं हैं। यह भी आरोप लगाया कि प्राथमिकी दर्ज न कराने की एवज में मुझसे 50 हजार रुपये की मांग एक व्यक्ति द्वारा कराई गई। रुपये न देने पर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई।