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जिले के कांच-चूड़ी उद्योग के लिए निराशा, किसान-मजदूरों में खुशी

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फिरोजाबाद। केंद्र सरकार के अंतरिम बजट से सुहागनगरी का हर वर्ग खुश नजर आया। आयकर छूट की सीमा पांच लाख कर देने से मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग संतुष्ट हैं।

हालांकि जिले के उद्यमियों का मानना है उद्योग के लिए सीधे तौर पर बजट में कुछ खास नहीं है लेकिन कारोबारियों का कहना है कि बजट में अन्य जो प्रावधान किए हैं उसका असर उद्योगों पर भी दिखाई देगा।
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बजट में रोजगार के मोर्चे पर खामोशी से युवा कुछ निराश हैं जबकि मजदूरों के लिए पेंशन योजना, पीएफ-बोनस से श्रमिकों की बजट पर सकारात्मक प्रतिक्रिया है। कांच चूड़ी उद्योग और निर्यात के क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणा न होने से कारोबार क्षेत्र में जरूर निराशा की स्थिति दिखी।


फिरोजाबाद जिले की आबादी करीब 25 लाख है। चूड़ी और कांच के कारखानों में लाखों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। यूं तो यहां मजदूरों की आबादी दस लाख है लेकिन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक करीब ढाई लाख हैं।

धनाढ्य वर्ग सीमित संख्या में है शेष लाखों की आबादी मध्यम वर्ग से जुड़ी है। जिले में कुल आबादी के करीब 14 प्रतिशत अल्पसंख्यक जिले में हैं। आबादी के नजरिए से किसान, मजदूर, अल्पसंख्यक और मध्यम वर्ग के लिए बजट में इतना कुछ दिया है कि यह तबका यही कहते नजर आया कि बजट में हमारा ख्याल रखा गया है।

आयकर छूट सीमा पांच लाख रुपये कर देने से आम व्यापारी और नौकरीपेशा खुश हैं। लघु और सीमांत किसानों को छह हजार रुपये देने के प्रावधान से जिले के करीब डेढ़ लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।


अंतरिम बजट का आने वाले भविष्य में गरीब, मध्यम वर्गीय परिवार, किसान, छोटे उद्यमी, व्यापारियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। बजट के प्रावधानों से स्टार्टअप, मुद्रा लोन की सीमा बढने से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। जनता की उम्मीद के मुताबिक यह अच्छा बजट है। -कुशल गुप्ता, चाटर्ड एकाउंटेंट


केंद्र सरकार ने लुभावना बजट पेश किया है। हालांकि इस बजट में हर वर्ग का ध्यान भी रखा गया है। आयकर में छूट सीमा दोगुना करने से हजारों लोग टैक्स के दायरे में आने से बच गए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी रिटर्न दाखिल करना पड़ता था, टैक्स स्लैब बढ़ने से इनको भी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो इसे एक अच्छा बजट कह सकते हैं। -प्रो. एस.के. वर्मा , अर्थशास्त्री एसआरके कालेज
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बजट में हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की गई है। आमजन की सालों पुरानी मुराद इस बजट में पूरी होती दिखाई दे रही है। उद्योग के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है लेकिन मध्यम वर्ग को खुश करके मोदी सरकार ने परोक्ष रूप से कारोबार को भी गति देने की कोशिश की है। यूं कहा जा सकता है देर आए दुरूस्त आए..। -पीके झिंदल, अध्यक्ष सेवार्थ संस्थान
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