कासगंज। केरल में आई भयावह बाढ़ का असर जिले के पान कारोबार पर पड़ा है। पिछले कई दिनों से केरल से लंका पान की आवक नहीं हुई है। जिससे बाजार में यह पान तलाश करने पर भी नहीं मिल पा रहा। जबकि ईद पर्व के चलते इसकी डिमांड बढ़ी हुई। शौकीन अन्य पान के सहारे अपनी गुजर कर रहे हैं।
जिले में लंका पान केरल से आता है। सप्ताह में पांच दिन गाड़ियों से केरल के कारोबारी इस पान को जिले के कारोबारियों को भेजते हैं। जनपद भर में प्रतिदिन इस वैरायटी का करीब 40 हजार पान खपत हो जाता है। केरल में आई भयावह बाढ़ से इस पान की आवक पर असर पड़ा है। पिछले कई दिनों से पान की आवक नहीं हुई है। इससे बाजार में इसका स्टॉक पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। बताया जाता है कि मुस्लिम समाज के लोग इस पान को शौक से खाते हैं। बढ़ी तादाद में वे प्रतिदिन इस पान की खरीद करते हैं। ईद पर्व की वजह से इस पान की मांग और भी बढ़ गई है, लेकिन शौकीनों को इस पान की उपलब्धता नहीं हो पा रही। जबकि बाजार में अन्य पान उत्पादक क्षेत्रों से आने वाले बनारसी, देशी, मिठुआ, बंगला आदि पान उपलब्ध है। लंका पान न मिलने से शौकीन मायूस हो रहे हैं, मजबूरी मेें वे अन्य वैरायटी का पान खरीद कर काम चला रहे हैं। पान कारोबारी राकेश गुप्ता ने बताया कि जनपद में कई कारोबारी पान का कारोबार करते हैं। लंका पान की वैरायटी मात्र केरल से ही आती है। सप्ताह में मंगलवार व गुुरुवार को छोड़कर शेष दिन केरल से पान की आवक होती है। पिछले कई दिनों से पान नहीं आ पाया है। ईद पर्व की बजह से इसकी डिमांड बढ़ी हुई है, लेकिन बाजार में पान इस समय उपलब्ध नहीं है। केरल में बाढ़ से राहत मिलने पर ही पान आने की उम्मीद है। एक सप्ताह में जनपद भर में लगभग 150 टोकरी लंका पान की बिक्री हो जाती है।