फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। आधुनिक मशीनें और आलीशान बिल्डिंग बन रही हैं। लेकिन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से उपचार के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे हैं। रविवार को इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं होने से गंभीर हालत में आए रिक्शा चालक ने इमरजेंसी में तड़प कर दम तोड़ दिया। जबकि अस्थमा के मरीज का उपचार नहीं होने पर परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल ले गए। नसीरपुर से आए झगड़े में घायल पिता-पुत्र का मेडिकल भी नहीं हुआ।
संयुक्त चिकित्सालय में नवीन इमरजेंसी का कुछ माह पूर्व अधिकारियों की मौजूदगी में विधायक ने उदघाटन किया था। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विधायक डॉ. मुकेश वर्मा ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के वादे किए थे। लेकिन किसी ने इमरजेंसी और अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती पर ध्यान नहीं दिया।
अस्पताल में आधुनिक मशीनें हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले नहीं होने से मशीने धूल फांक रहीं हैं। अस्पताल में सर्जन, फिजिशीयन, ऑर्थो और चाइल्ड स्पेशलिस्ट नहीं है। अस्पताल में मात्र एक एमओ हैं। जिनके छुट्टी पर जाने से अस्पताल अनाथ हो जाता है।
रविवार को स्टेट बैंक के पास पड़े एक बीमार रिक्शा चालक को पुलिस इमरजेंसी लाई, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से मरीज स्ट्रेचर पर तड़पता रहा। स्टाफ ने बैड पर लिटा कर प्राथमिक उपचार देने का साहस नहीं किया। इसके चलते रिक्शा चालक ने तड़प कर दम तोड़ दिया। रिक्शा चालक की मौत के बाद पुलिस कर्मियों ने उसकी डायरी में लिखे मोबाइल नंबर पर फोन पर उसकी शिनाख्त फर्रुखाबाद निवासी रामप्रकाश उर्फ संजू के रुप में हुई।
नसीरपुर थाना क्षेत्र के गांव धनपुरा में झगड़ा में घायल पिता-पुत्र अस्पताल पहुंचे। दोनों को थाने से मजरूबी चिट्ठी देकर भेजा गया था, लेकिन डॉक्टर न होने से मेडिकल नहीं हो सका। फार्मासिस्ट ने उन्हें सोमवार को आने या फिरोजाबाद जिला अस्पताल में मेडिकल कराने की सलाह दी। इसके बाद घायल सुपात्र पुत्र धीरी सिंह और धीरी सिंह पुत्र मनफूल व्यवस्था को कोसते हुए लौट गए।