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59 साल में एक कदम नहीं बढ़ सकी रेल

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एटा। 18 जनवरी 1959, आज वह दिन है जब एटा को विकास के रूप में रेलवे लाइन को तोहफा मिला था। देश के रेल उपमंत्री और जिले के सांसद स्व. रोहन लाल चतुर्वेदी के प्रयासों से जिले को रेलवे लाइन की सौगात मिली थी। प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने खुद एटा आकर रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हालांकि रेल की चाल और हाल नहीं बदला। आज रेलवे के स्थापना दिवस को 59 साल पूरे हो गए, लेकिन रेल परिवहन की हकीकत से कोई अनजान नहीं है।
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साल 2008 से चल रहे आंदोलनों के बाद साल 2016 में ट्रेन के नाम पर जिले में आगरा-एटा फास्ट पैसेंजर तो आई, लेकिन इसकी रफ्तार भी सुस्त पड़ी रही। जिले में आगरा-एटा होली फास्ट पैसेंजर ट्रेन के संचालन की रेलवे ने अनुमति दी। राजनीतिक पहल और संगठनों की कोशिश के बाद एक महीने के लिए शुरू की गई पैसेंजर ट्रेन ने लोगों को राहत दी, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रही। शुरुआत भी रेलवे को फास्ट पैसेंजर ट्रेन के ठहराव को लेकर विरोध झेलना पड़ा।
इसके साथ ही वर्ष 2017 के रेल बजट में एटा-कासगंज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए बजट मिला, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका। राजनीतिक दलों और जनता के बीच रहने वाला रेल विस्तार और रेल आज भी सुविधाओं के अभाव में है।
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समाजसेवी मेधाव्रत शास्त्री कहते हैं कि यह जिले का दुर्भाग्य है कि पूर्वजों की विरासत को सहेजने में जिला फेल रहा। जनप्रतिनिधियों और सरकारों ने हमेशा रेल परिवहन को लेकर उपेक्षित किया।
अखिल यादव संघर्षी कहते हैं कि रेल विस्तार को लेकर अब चुप नहीं बैठा जाएगा। सांसद स्व. रोहन लाल चतुर्वेदी की इस देन को विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे।

सर्वे के फेर में अटका रेल विस्तार
जिले को एटा-अलीगढ़ रेलवे लाइन सर्वे की सौगात मिली, लेकिन यह भी कारगर नहीं रही। पिछले आठ साल से सर्वे का लॉलीपॉप पा रहे जिले के लोगों की उम्मीदें रेल बजट में टूटतीं रहीं। रेलवे की ओर से सर्वे का काम भी शुरू नहीं किया गया। इस पर लोग आक्रोश जताकर रह गए।
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