मथुरा/वृंदावन। भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली वृंदावन रविवार को धन निरंकार के उद्घोष से गूंज रही थी। वृंदावन छटीकरा मार्ग स्थित मैदान में निरंकारी भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। उल्लास इस बात का था कि कृष्ण की नगरी में पहली सद्गुरु माता सविंदर हरदेव महाराज की अमृतवाणी से प्रभु का साक्षात्कार होगा। इसी ललक में हजारों कदम कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़े जा रहे थे।
निरंकारी माता सविंदर हरदेव ने कहा कि सभी को प्रभु के ज्ञान की रोशनी में लाएं और प्यार फैलाएं। प्रीत, प्यार, नम्रता, विशालता, सहनशीलता और एकत्व वाली शिक्षा को अपनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि दूसरों को समझाने से पहले अपने स्वभाव को जांचें। प्रभु ज्ञान की रोशनी अपने अंदर लाएं और दुनियां के कौने-कौने में रोशनी का आनंद प्रदान करें।
इस संत समागम में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों से निरंकारी भक्तों आगमन हुआ। संत समागम पर निरंकारी भक्तों के मिलन पर उनके अभिवादन का तरीका भी आकर्षण का केंद्र रहा। भक्त एक-दूसरे के चरण छूकर और मुख से धन निरंकार कहते हुए अभिवादन कर रहे थे। युवा प्रचारक किशोर स्वर्ण ने बताया कि निरंकारी भक्त जब भी आपस में मिलते हैं एक दूसरे के चरण स्पर्श कर अभिवादन करते हैं क्योंकि उन्हें सद्गुरु द्वारा यह ज्ञात हो चुका है कि एक ज्योति है सब के अंदर नर है चाहे नारी है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, हरिजन प्रभु की रचना सारी है। एक-दूसरे के चरणों में झुकने से अभिमान से भी बचते हैं।
संत समागम में आध्यात्मिक सत्संग का शुभारंभ गुरु वाणी, अवतार वाणी से हुआ। इसमें विभिन्न स्थानों से पधारे वक्ताओं ने सद्गुरु से परमात्मा के साक्षात्कार करने का मशवरा दिया, वहीं प्रसिद्ध गीतकार, कलाकारों ने प्रेरणादायक भजन एवं कविताएं प्रस्तुत कीं। ओपी अरोड़ा, रघुनंदन सराफ, विनोद अरोड़ा, अंकित त्रिपाठी, विकास हरिनारायण अग्रवाल, मुन्ना, दारा सिंह, खेमचंद, मूलचंद कर्दम, भगवती प्रसाद, संतोष, मोहन सिंह, अशोक, योगेश आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। जोनल इंचार्ज कांता मेहंद्रु, जिला संयोजक हरविंद्र कुमार ने आभार व्यक्त किया।
निरंकारी सेवादल ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
मथुरा/वृंदावन। संत समागम में हजारों की संख्या में भक्तों ने भाग लिया। ऐसे में उनके प्रवेश, कतारबद्ध होकर समागम स्थल तक पहुंचने, पेयजल, पार्किंग और ट्रैफिक जैसी व्यवस्थाओं की कमान निरंकारी सेवादल के कार्यकर्ताओं ने संभाली। इस दल की 15 यूनिटाें का सहयोग रहा। इसमें प्याऊ, लंगर, कैंटीन, विश्राम, खोया पाया, प्रकाशन, पार्किंग, यातायात व्यवस्था सेवादल ने स्वयं संभाल रखी थी।