एटा। कृषि प्रधान जिले में सिंचाई व्यवस्थाएं अपर्याप्त हैं। एक लाख 90 हजार हेक्टेयर भूमि पर लगे 516 नलकूपों में से तीस प्रतिशत काम नहीं कर रहे। इतना ही नहीं 106 नलकूप जहां परित्यक्त हैं वहीं 23 फेल हो चुके हैं।
सिंचाई अव्यवस्थाओं से जूझ रहे जिले को दशकों बाद भी राहत नहीं मिल रही। चौथाई जिला जहां खारे पानी की समस्या से जूझ रहा है। वहीं इतना ही भाग को डार्क जोन का दंश डस रहा है। एक लाख 90 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि की सिंंचाई के लिए जिले में 516 राजकीय नलकूप लगाए गए हैं। इनमें से 146 नलकूप काम नहीं कर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विकास खंडों के 106 नलकूप काम नहीं कर रहे हैं। वहीं 23 फेल हो गए हैं। यानी इन्हें रिबोर भी नहीं किया जा सकता। वहीं 17 नलकूपों में सुधार की संभावनाएं हैं। सच्चाई इससे भी इतर है। किसानों के अनुसार विभागीय आंकड़ों में सुचारु दिखाए जा रहे कई और नलकूप भी खराब हैं।
रवि की फसल में रहेगा पानी का संकट
आलू की बुबाई शुरू हो गई हैं और गेहूं की बुबाई होनी है। जिले में नलकूपों की हालत देखकर यह तो साफ हो गया है कि सिंचाई के लिए किसानों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि रवि की फसल में सबसे अधिक पानी की जरूरत होती है।
विकास खंड कुल नलकूप सुचारु परित्यक्त फेल सुधारात्मक लक्ष्य
शीतलपुर 58 47 08 00 03
निधौली कलां 95 61 21 09 04
सकीट 59 27 22 04 06
मारहरा 58 52 03 02 01
जैथरा 108 91 15 01 01
अलीगंज 109 88 17 02 02
अवागढ़ 04 04 00 00 00
जलेसर 20 00 20 00 00
जिले में लगे 516 नलकूपों में से वर्तमान में 370 ही सुचारु हैं। 106 नलकूप छोड़े जा चुके हैं। जांच में 23 नलकूप फेल हुए हैं। वहीं 17 में सुधार की संभावनाएं हैं। इसकी सूचना समय समय पर शासन को प्रेषित की जाती है।
लक्ष्मण सिंह, अधिशासी अभियंता, नलकूप विभाग