प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ने लगी है। घर में अगर शौचालय नहीं है तो महिलाएं भी जिद कर शौचालय निर्माण की जिद करने लगी हैं। ऐसा ही मामला मारहरा ब्लाक के गांव रामई में सामने आया। घर में शौचालय नहीं था तो बहू ने शौचालय के लिए बाहर जाने से इनकार कर दिया। इस पर ससुरा सुरेश ने बहू की बात को सही मानते हुए पैसे न होने के बाद बावजूद बकरियां बेचकर घर में ही शौचालय बनवा दिया। नेत्रहीन सुरेश की इस पहल को शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी मंच से सराहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को ओडीएफ करने की कवायद चल रही है। जहां एक ओर प्रशासन गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुले मेें शौच के प्रभावों को जानकर लोग खुद ही पहल कर रहे हैं।
मारहरा ब्लॉक के गांव रामई निवासी नेत्रहीन बुजुर्ग 60 वर्षीय सुरेश के घर में शौचालय नहीं था। सुरेश के साथ सेवा के लिए उनका भतीजा रहता है। दोनों लोग खुले में ही शौच जाते थे। करीब एक साल पहले सुरेश के भतीजे की शादी गांव धुआई की शिवानी से हुई। शिवानी जब ससुराल आई, तो पहले उसने अपने पति से खुले में शौच जाने से मना किया। पति ने बात को अनसुना किया, तो उसने अपने नेत्रहीन चचिया ससुर सुरेश को पीड़ा बताई। पहले तो सुरेश ने भी आर्थिक समस्या होने से मना कर दिया। मगर एक दिन टीवी पर अमिताभ बच्चन का स्वच्छ भारत मिशन का दरवाजा बंद विज्ञापन देख उनकी सोच बदली। उन्होंने अपनी दो बकरियों को बेचा और घर में शौचालय बनवाया। पिछले दिनों गांव में ट्रिगरिंग करने पहुंची स्वच्छ भारत मिशन की टीम को जब यह जानकारी हुई, तो उन्होंने सुरेश से बात की। शुक्रवार को सम्मेलन में बुजुर्ग सुरेश को सम्मानित किया गया।
दिव्यांग छोटेलाल ने कर्ज लेकर बनवाया शौचालय
सकीट ब्लॉक के गांव फफोतू निवासी दिव्यांग छोटेलाल ने कर्ज लेकर शौचालय बनवाया। घर की महिलाओं को खुले में शौच जाने में दिक्कत होती थी। पिछले दिनों टीम गांव पहुंची, तो समन्वयक बृजमोहन ने छोटेलाल को समझाया। इसके बाद उन्होंने गांव के लोगों से कर्ज लेकर शौचालय का निर्माण कराया। छोटेलाल मंच पर शौचालय बनवाने पर प्रशस्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचे तो उप मुख्यमंत्री ने उनका अभिवादन किया।