शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए आबादी के बीच से होकर गुजर रहे नालों की सफाई के लिए पालिका ने कोई कार्य योजना नहीं बनाई है। पालिका की यह लापरवाही लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है। शहर की अधिकांश बस्तियों में जरा सी बारिश होते ही जलभराव हो जाता है।
मानसून के सीजन में तो स्थिति और भी विकट हो जाती है।
नगर पालिका ने शहर से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए आधा दर्जन नालों का निर्माण करा रखा है।
इनमें से बिलराम गेट चौराहे से नावलटी रोड, गंदा नाला, लालपुर तक, गली सत्तार बैंड से अमांपुर रोड होकर काली नदी तक, अशोक नगर से सोरों गेट होकर डागा स्कूल तक, आवास विकास कालोनी के नाले आबादी के बीच से होकर गुजर रहे है। इन नालों की सफाई को पालिका गंभीरता नहीं दिखाती।
पालिका ने कई सालों से इन नालों की सफाई नहीं कराई है। जेसीबी की सहायता से ऊपरी हिस्से का कूड़ा निकालकर काम चलाया जाता है। इस सफाई के बाद ये नाले एक दो दिन ही साफ दिखाई देते है। इसके बाद फिर से गंदगी से अट जाते है।
इसके बाद भी बारिश के दिनों में शहर में जलभराव की समस्या जस की तस रहती है। पालिका ने इस साल नालों की सफाई के लिए जो कार्य योजना तैयार की है उसमें फिर से इन नालों को छोड़ दिया गया है। मालगोदाम चौराहे से काली नदी तक, सरस्वती शिशु मंदिर से होकर काली नदी में गिरने वाले नालों की ही सफाई कराई जा रही है।
मालगोदाम से होकर गुजरने वाले नाले के क्षेत्र में जो बस्तियां आती हैं उनमें जलभराव की कोई समस्या नहीं है। पालिका की यह अनदेखी बारिश के मौसम में फिर से लोगों के लिए मुसीबत बनेगी। पिछले दिनों हुई हल्की सी बारिश में शहर जलमग्न हो गया था।
गली बोहरान निवासी हजारी लाल चोला का कहना है कि उनके क्षेत्र में जरा सी बारिश में ही पानी भर जाता है। जिससे लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं।
कारोबारी राजीव वार्ष्णेय का कहना है कि नालों की सफाई को पालिका गंभीरता नहीं दिखाती। नगर में जल भराव की समस्या काफी गंभीर है। बारिश होने पर लोग घरों में कैद हो जाते हैं या फिर गंदे पानी से हेाकर गुजरने को मजबूर होते हैं।
सफाई निरीक्षक यशपाल का कहना है कि पालिका ने नालों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। पालिका कर्मी नालों की सफाई में लगाए गए हैं। जल्द ही सभी नालों की सफाई पूरी हो जाएगी।