शादी का 38वां साल, उम्र का छठा दशक और मातृत्व सुख। यह कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है। टेस्ट ट्यूब बेबी (आईवीएफ) तकनीक से 60 साल की आयु में भी पूरन देवी की गोद बेटे से भर गई है। परिवार में खुशी का कोई ठिकाना नहीं तो चिकित्सा जगत इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
शास्त्रीपुरम के रोशन सिंह (61) शादी के करीब चार दशक बाद भी संतान सुख से वंचित थे। तमाम इलाज के बावजूद उनकी पत्नी पूरन देवी की गोद सूनी ही रही। आईवीएफ तकनीक से संतानोत्तपत्ति के बारे में पता चला तो उन्होंने रवि वूमेन हास्पिटल में संपर्क किया। चिकित्सक पूरनदेवी की उम्र देख पसोपेश में थे। लेकिन पूरन देवी की जिद और जज्बे को देख डाक्टरों ने प्रक्रिया शुरू कर दी।
गर्भधारण तक की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई लेकिन इसी बीच 21 अक्तूबर को एक और मुसीबत ने चिकित्सकों का इम्तिहान लिया। पूरन देवी के आंत में संक्रमण फैल गया। उनकी जान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई। आपरेशन हुआ और ममता जीत गई। बीते गुरुवार को पूरन देवी ने पौने दो किग्रा के बेटे को जन्म दिया। उनके परिवार ने अस्पतालकर्मियों के साथ यह खुशी धूमधाम के साथ बांटी।
ऐसे मिली सफलता
पूरन देवी की माहवारी बंद होने से अंडे सूख चुके थे। ऐसे में युवा महिला के अंडे और उनके पति के स्पर्म को लैब में निषेचित कराया गया। विकसित होने पर भ्रूण को पूरन देवी के बच्चेदानी में स्थापित किया। हार्मोंस बढ़ाने के लिए दवाएं भी दी गईं। चिकित्सकीय निगरानी में आठवें महीने में प्रसव हुआ। आईवीएफ विशेषज्ञ डा. रजनी पचौरी ने बताया कि 40 साल के बाद ही गर्भधारण कराना चिकित्सकाें के लिए चुनौती होती है। ऐसे में 60 की उम्र में संतान सुख दिला पाना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया इस विधि से उनके अस्पताल में अब तक 1056 महिलाओं को मातृत्व सुख दिलाया जा चुका है।
गर्भधारण में यह हैं बाधक
- शादी के बाद पहली संतान में देरी
- गर्भ निरोधक दवाआें का इस्तेमाल
- महिला के अंडे न बनना
- पुरुष के कमजोर स्पर्म