बैंक ऑफ बड़ौदा (सांकेतिक तस्वीर)
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आगरा में एक साझीदार ने फर्म के बैंक खाते से रुपयों की निकासी करने पर रोक लगवा दी। आरोप है कि इसके बाद भी दूसरे साझीदार ने बैंक के शाखा प्रबंधक से मिलीभगत कर 58.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की। रकाबगंज थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थाना हरीपर्वत क्षेत्र के बाग फरजाना निवासी रोहन कत्याल ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की। आरोप लगाया कि वह और थाना रकाबगंज के बालूगंज निवासी सुमित जैन नुनिहाई की फर्म में 50-50 प्रतिशत के साझीदार हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की एमजी रोड शाखा में फर्म का खाता खुलवाया था। जिसे दोनों संचालित करते थे। 2013 में हिसाब में विवाद होने पर उन्होंने 18 नवंबर 2013 को बैंक के उच्चाधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक प्रस्तुत कर फर्म के खाते के संचालन पर रोक लगाने का आग्रह किया।
तत्कालीन शाखा प्रबंधक एके गुप्ता ने शिकायत के बाद भी सुमित जैन को रुपये निकालकर दे दिए। तब 2014 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद भी दूसरे शाखा प्रबंधक जे अशोक कुमार ने बिना अनुमति के 19 नवंबर 2020 को 18 लाख रुपये, 5 अप्रैल 2021 को 40 लाख, 24 मई 2023 को 50 हजार रुपये सुमित जैन के साथ साठ-गांठ कर दि ट्रेडिंग काॅरपोरेशन के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस तरह से रोक के बावजूद भी उनकी फर्म के खाते से 58.50 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए।