खुले आसमां के नीचे काटी रात, तबाही के मंजर ने झपकने नहीं दीं पलकें
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कासगंज। आग से तबाह हुए गांव महरी और नगला टिकुरी के ग्रामीणों की आंखों के सामने से तबाही का मंजर हट नहीं रहा है। मंगलवार की रात उन्होंने खुले आसमां के नीचे काटी। बर्बादी का मंजर याद कर तमाम ग्रामीण रातभर बेचैन रहे, उनकी पलकें नहीं झपकी। बुधवार को अस्थायी आशियानों में तपती दोपहरी में ग्रामीणों को बेहाल कर दिया।
गांव महरी ओर नगला टिकुरी में मंगलवार की सुबह भीषण आग लगी। आग ने चार घंटे तक तबाही मचाई और 65 घर फूंक डाले। अब ग्रामीणों के सामने रहने और खाने पीने की समस्या पैदा हो गई है। प्रशासन ने मंगलवार को भोजन का इंतजाम कराया, लेकिन रात तक स्थायी आशियानों का कोई इंतजाम नहीं हुआ। ऐसे में महिला, बच्चे बुजुर्ग सब परेशान रहे। खुले आसमां के नीचे जिसे जहां जगह मिली रात गुजारी लेकिन ग्रामीणों की आंखों के सामने तबाही मंजर झलकता रहा। ऐसे में तमाम ग्रामीण रात भर नहीं सो सके। बुधवार सुबह ही सरकारी मुलाजिम इन दोनों गांवों में पहुंच गए। उपजिलाधिकारी शिवकुमार ने ग्रामीणों को सुबह चाय और ब्रेड का वितरण कराया। उसके बाद सरकारी नुमाइंदों ने ग्रामीणों को त्रिपाल देकर अस्थायी आशियाने तैयार करने को कहा। दोपहर तक कई ग्रामीणों ने अपने आशियाने भी तैयार कर लिए। लेकिन कड़ी धूप में अस्थायी आशियानों में ग्रामीणों परेशान होकर रह गए।
ग्रामीणों का दर्द -
अग्निकांड की घटना से पूरी तरह से तबाही हो गई है, अब इस बर्बादी से न जाने कैसे उबरेंगे। पूरा परिवार इस घटना के बाद से टूट गया है, दाने दाने को मोहताज हो गए हैं। अमर सिंह, ग्रामीण।
प्रशासन द्वारा दी जा रही मुआवजा राशि काफी कम है। इस राशि से कोई भला नही होगा। आग से हुई बर्बादी अब सहज उबरने नहीं देगी। अशोक कुमार, ग्रामीण।