फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी को लेकर फिर मचेगा हाहाकार, नलकूप ठप, हैंडपंप बेकार

विज्ञापन
खराब हैंडपंप
विज्ञापन
मथुरा। पानी को लेकर महानगर में फिर हाहाकार मचने जा रहा है। जलस्तर गिर जाने से नलकूप भी पानी का साथ छोड़ने लगे हैं। हैंडपंप भी खराब हो रहे हैं। वहीं, आबादी के हिसाब से महानगर को 90 एमएलडी पानी चाहिए, पर सप्लाई सिर्फ 20 एमएलडी की हो रही है। गोकुल बैराज से सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं होता है।
विज्ञापन


महानगर की जनसंख्या 7 लाख 35 हजार है। जनसंख्या के हिसाब से करीब 90 एमएलडी पेयजल की आवश्यकता है परंतु निगम द्वारा सिर्फ 13 एमएलडी पानी की सप्लाई गोकुल बैराज से की जा रही है। जबकि नलकूप और टंकियों के माध्यम से 7 एमएलडी पानी और मिल रहा है। इस हिसाब से 20 एमएलडी पानी ही दिया जा रहा है। गोकुल बैराज से जो पानी आ रहा है अधिकतर लोग इसका प्रयोग घरेलू कार्यों में तो कर लेते हैं लेकिन पीते नहीं हैं। उनके द्वारा पीने के लिए अन्य श्रोतों का प्रयोग किया जा रहा है।

नगर निगम का दावा है कि निगम क्षेत्र में लगे 50 से अधिक नलकूप और 100 हैंडपंप प्यास बुझा रहे हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर नलकूप पानी का साथ छोड़ रहे हैं जिसके चलते लोगों की पेयजल किल्लत बढ़ती जा रही है । लगभग सभी पार्षदों ने अपने यहां पेयजल किल्लत की जानकारी निगम को दी है । इस संबंध में जलकल एई राधेश्याम ने बताया कि पेयजल सप्लाई के लिए हम नलकूप को समय-समय पर ठीक कराते रहते हैं ।
विज्ञापन


पार्षद बोले, पेयजल की किल्लत
पार्षद रीतेश पाठक, तिलकवीर सिंह, मनोज श्रीवास्तव, उमेश भारद्वाज आदि ने बताया कि उनके क्षेत्र में पेयजल की समस्या है। पीने के पानी के लिए जनता बहुत परेशान है ।

66 करोड़ की योजना पर नहीं हो पा रहा कियान्वयन
योजनाएं तो बन जाती हैं परंतु उनके क्रियान्वयन नहीं हो पाता है । यही हाल जल निगम की 66 करोड़ की परियोजना का है। 30 करोड़ से करीब 75 किलोमीटर पाइप लाइन के माध्यम से 8835 कनेक्शन दिए जाने थे। निगम की लापरवाही के चलते इस योजना में नलकूप तथा टंकी बनाने के लिए स्थान ही नहीं मिल पा रहा है। वहीं, 36 करोड़ की योजना के टेंडर की शासन को स्वीकृति नहीं मिल सकी है ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें