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मंडलीय सत्यापन जारी, टीम खोलेगी ओडीएफ की पोल

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एटा। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों के निर्माण और उपयोग की पड़ताल शुरू हो चुकी है। मिशन के तहत ओडीएफ किए गए जिले की हकीकत जानने के लिए मंडलीय टीम ने सत्यापन का काम शुरू कर दिया है।
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टीम को कई गांवों में शौचालयों की स्थिति बदतर मिल रही है, तो कहीं शौचालय बने ही नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो टीम को जिले में कई गांव ऐसे मिले हैं जो ओडीएफ की पात्रता को पूरा नहीं कर रहे। सत्यापन के बाद टीम इन गांवों को निरस्त करने तैयारी में है।

दरअसल, प्रशासन ने 30 अक्तूबर को जिले को ओडीएफ घोषित किया था। जिला प्रशासन ने 700 से अधिक गांवों को खुले में शौच मुक्त मानते हुए जिले को ओडीएफ कर दिया। अब मंडलीय सत्यापन ओडीएफ की हकीकत बताने को तैयार है। किसी भी गांव या नगर के ओडीएफ घोषित होने के तीन महीने बाद मंडलीय सत्यापन किया जाता है।
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जिले को ओडीएफ घोषित हुए तीन महीने का वक्त पूरा होने जा रहा है। ऐसे में मंडलीय टीम ने जिले के गांवों का दौरा शुरू कर दिया है। कई जगहों पर टीम को मिशन के नाम पर की गई लीपापोती भी मिली है। बता दें कि बीते साल जिले में ओडीएफ किए गए 124 गांवों में से 66 गांवों को मंडलीय टीम ने निरस्त कर दिया था। इस बार भी उम्मीद है कि मंडलीय टीम जिला प्रशासन के कारनामे को उजागर कर सकती है।

मंडल के बाद थर्ड पार्टी सत्यापन
जिले में बीते साल मंडलीय टीम द्वारा किए गए सत्यापन में भी कुछ गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसे लेकर शासन ने थर्ड पार्टी सत्यापन की भी व्यवस्था की है। मंडलीय टीम के बाद शासन की ओर से ओडीएफ का सत्यापन कराया जाएगा।

मारहरा ब्लॉक के सबसे अधिक गांव
बीते सालों में ओडीएफ करने के बाद निरस्त किए गए गांवों में सबसे ज्यादा गांव मारहरा और जैथरा ब्लॉक के थे। इसके बाद भी मारहरा ब्लॉक को ही प्रशासन ने ओडीएफ कर दिया। अब पूरा जिला ओडीएफ करने के बाद हकीकत कुछ और ही नजर आएगी।
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