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सीडीओ की नहीं सुनते मंडी सचिव

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मैनपुरी। मंडी में किसानों से कटौती का खेल जारी है। मुख्य विकास अधिकारी के आदेश के बाद भी मंडी सचिव ने कोई कार्रवाई नहीं की। लिहाजा मंडी में किसानों से कटौती का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आखिर क्यों मंडी प्रशासन कार्रवाई करने से कतरा रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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शहर की नवीन मंडी में रोजाना सैकड़ों किसान अपनी फसल बेचने के लिए आते हैं। यहां उनके साथ खुली लूट की जाती है। फसल बिक्री के बाद भुगतान पर एक फीसदी की कटौती की जा रही है। जब किसान इसका विरोध करते हैं तो उन्हें भुगतान करने से मना कर दिया जाता है। इतना ही नहीं किसी भी किसान को बिक्री की 6-आर रसीद नहीं दी जाती है।

किसानों को सादा कागज पर हिसाब लिखकर दे दिया जाता है। अमर उजाला ने मंडी में चल रहे खेल को उजागर किया था। इसके बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए मंडी सचिव को कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया था। इसके बाद भी मंडी सचिव ने न तो कटौती रुकवाई और न ही 6-आर की रसीद मिलना शुरू हुई।
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इसके बाद एक बार फिर किसानों ने किसान दिवस के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी से कटौती रुकवाने की मांग की। इस पर सीडीओ कपिल सिंह ने मंडी सचिव को मौके पर ही निर्देशित किया था, कि हर हाल में कटौती रुकवाई जाए। इसके लिए दुकानों का निरीक्षण कर उन्होंने लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश दिए थे।

वहीं, दूसरी ओर मंडी समिति आढ़तियों पर मेहरबान है। अब तक कटौती रुकवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। ऐसे में साफ है कि कहीं न कहीं मंडी प्रशासन को सीडीओ के आदेश की चिंता ही नहीं है।

सुनने में तो एक फीसदी कटौती शायद बहुत कम लगती है, लेकिन मंडी में बहुत बड़ा गोलमाल होता है। रोजाना नवीन मंडी में पांच करोड़ रुपये की फसल की बिक्री की जाती है, ऐसे में अगर एक फीसदी के हिसाब से रोजाना पांच लाख रुपये आढ़ती बचाते हैं। लेकिन मंडी प्रशासन इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करता है।

व्यवस्थाएं देखने और किसानों के साथ न्याय कराने के लिए मंडी समिति का कार्यालय मंडी परिसर में ही बनाया गया है। यहीं मंडी सचिव से लेकर मंडी निरीक्षक व अन्य कर्मचारी रोजाना बैठते हैं, लेकिन कमाल देखिए कि मंडी के अधिकारियों को एक फीसदी कटौती की भनक नहीं है। सवाल ये भी है कि क्या ये संभव है।
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