एटा। सरकार योजनाओं और व्यवस्थाओं को आनलाइन करने पर जोर दे रही है, लेकिन व्यवस्थाओं के चलते संचालन के लिए संसाधनों का अभाव है। जिले में तमाम विभाग ऐसे हैं, जहां व्यवस्थाएं और कार्यप्रणाली आनलाइन और कंप्यूटराइज्ड है, लेकिन विभाग पर संसाधन नहीं हैं। हम बात कर रहे हैं औषधि प्रशासन विभाग की। यहां व्यवस्थाएं नाकाफी हैं।
दरअसल, औषधि प्रशासन राज्यमंत्री अतुल गर्ग जिले के प्रभारी मंत्री हैं। पिछले दिनों विभाग ने दवा लाइसेंस बनाने के लिए पेपर लैस व्यवस्था की शुरुआत की है। इसके तहत हर दवा विक्रय लाइसेंस बनने की प्रक्रिया आनलाइन है। आनलाइन आवेदन के बाद अधिकारियों को आनलाइन रिपोर्ट लगानी होती है। मगर जिले में विभाग के पास कंप्यूटर नहीं है। जिले में एक औषधि निरीक्षक और एक बाबू के हवाले चल रहा विभाग खाद्य सुरक्षा विभाग के सहारे चल रहा है।
औषधि निरीक्षक को आनलाइन रिपोर्ट लगाने या अन्य विभागीय कार्यों के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के कंप्यूटर की मदद लेनी होती है। ऐसे में लाइसेंस बनाने की पेपरलैस प्रक्रिया को पलीता लग रहा है। इसे लेकर विभागीय अधिकारियों ने कई बार शासन को पत्र लिखा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आलम यह है कि प्रभारी मंत्री और विभाग के मंत्री अतुल गर्ग भी अपने ही विभाग के दफ्तर और संसाधनों की सुध लेने नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में विभागीय प्रक्रियाएं लटक रही हैं। औषधि निरीक्षक आशुतोष चौबे बताते हैं कि दवा विक्रय लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया आनलाइन है, इसके लिए काम चल रहा है। सीमित संसाधनों के सहारे विभाग अच्छे से कार्य रहा है। दवा विक्रेताओं पर अंकुश लगाया गया है।