कुसमरा/बिछवां/भोगांव। भगवान के मुख से निकली भागवत ज्ञान रूपी गंगा में जो गिर जाता है वह इस भव सागर से तर जाता है। लोगों को दूसरे का नुकसान करने से बचना चाहिए। यह प्रवचन कथा व्यास आचार्य दुर्वेश शास्त्री ने दिए।
कुसमरा की श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य न कहा भगवान के चरणों से निकली गंगा के पास तो लोगों को स्वयं चलकर जाना पड़ता है।
भागवत शरीर से नहीं पूरे मन से सुनना चाहिए तभी इसका फल मिलता है। सत्यवीर सिंह, अरविंद कुमार, आदेश, संजेश, रामकिशोर, अभिलाख सिह, रामदास, रामसेवक मौजूद रहे। बिछवां के पंचमुखी हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में आचार्य राहुल पाठक ने कहा कि रामायण की चौपाई में चौरासी प्रसंग हैं। इनका जो भक्त मन से ध्यान लगाकर श्रवण व पाठ करता है। वह चौरासी लाख योनियों के चक्कर में भटकने से बच जाता है।
रामकथा हमें जीवन के नियम सिखाती है जो भक्त राम कथा को सुनते हैं, उनके कष्ट दूर होते हैं। इस मौके पर भोले मिश्रा, सुखेंद्र सिंह, सर्वेश, लक्ष्मण सिंह, महावीर, कुश, बबलू, पवन आदि मौजूद रहे। भोगांव के ग्राम विनोदपुर में चल रही भागवत में आचार्य पं. देवेंद्र दीक्षित ने कहा कि मनुष्य का शरीर नाशवान है। इसलिए कभी भी शारीरिक सुंदरता पर घमंड नहीं करना चाहिए। इस मौके पर सच्चिनानंद तिवारी, आशीष तिवारी, संजीव तिवारी, शिवा तिवारी, अभिषेक तिवारी, बृहमानंद तिवारी मौजूद रहे।