फिरोजाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा के 100 मीटर परिधि तक नो डेवलपमेंट और 500 मीटर तक कूड़ा डंप करने पर 50 हजार जुर्माने का जहां फैसला सुनाया। वहीं, यमुना प्रदूषण पर चुपी साध रखी।
गंगा की सफाई के लिए सरकार द्वारा करोड़ों का बजट दिया जाता हैं तो वहीं यमुना सफाई अभियान के लिए सरकार का खजाना बंद हो जाता है।
करीब आठ लाख आबादी वाले फिरोजाबाद में यमुना 80 किलोमीटर में बहती हैं। इन 80 किलोमीटर में 24 से अधिक नालों का प्रदूषित पानी मुख्य बांस झरने के माध्यम से यमुना में गिरता है। जिले में 150 फैक्ट्रियां वर्तमान में संचालित हैं।
इनसे निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी यमुना में गिरता है। यमुना के किनारे रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण की वजह से मछलियां मर चुकी हैं। यहीं नहीं यमुना का पानी इतना प्रदूषित हो गया कि यमुना किनारे गांव में रहने वाले ग्रामीण मवेशियों को इसका पानी नहीं पिलाते हैं।
कोटला रोड बंबा चौराहे से निकलने वाले महादेव नगर नाला, दखल नाला ककरऊ से होकर शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित कारखानों और चूड़ी के प्लांटों में प्रयोग होने वाले खतरनाक केमिकल नाले के ही सहारे यमुना नदी तक पहुंच रहा है।
नालों का गंदा पानी रेलवे लाइन के किनारे झरना नाले से होते हुए बांस झरना के ही करीब यमुना नदी में गिरता है। पानी में केमिकल होने के कारण झाग निकलता देखा जा सकता है। चूड़ी की धुलाई में प्रयुक्त तेजाब व अन्य रसायनिक पदार्थ नालों से होकर यमुना में पहुंचता है। संतनगर की ओर से जाने वाला नाला भी फरौल नगरिया के पास यमुना में गिरता है।
इस कारण भी यमुना हो रही है प्रदूषित
वर्तमान में 24 से अधिक छोटे नालों का पानी यमुना में गिरता है।
वर्तमान में 150 फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं।
कांच फैक्ट्री से निकलने वाला केमिलयुक्त और चूड़ी की धुलाई में प्रयुक्त तेजाब भी प्रदूषण का कारण।
-यमुना नदी का पानी पहले किनारे के गांव के पशुओं को पिलाया करते थे, लेकिन अब तो पशु पानी नहीं पीते। यहां का पानी काफी जहरीला हो गया है।
आनंददास महाराज स्वर्गाश्रम गोशाला
-यमुना का पानी पहले पशुओं को पिलाने के साथ फसलों की सिंचाई के लिए किया करते थे। लेकिन अब फसलों के लिए तो नहीं करते, क्योंकि पानी फसलों को हानि पहुंचाता है।
धर्मवीर सिंह तोतलपुर
-यमुना नदी में गंदा पानी सिर्फ नया बांस झरना नाले के ही करीब नहीं गिरता, बल्कि फरौल नगरिया में गंदा पानी पहुंच रहा है। पहले कई गांव में सिंचाई नालों के पानी से होती थी परंतु कैमिकल के कारण अब नहीं करते।
रघुवर दयाल वर्मा,तोतलपुर
यमुना में गंदगीयुक्त पानी न गिरे इसके लिए नगर निगम को पहल करनी चाहिए। जहां तक कांच फैक्ट्रियों से कैमिकल जाने का सवाल है तो फैक्ट्री संचालकों से वार्ता करके उसे रोकने का प्रयास किया जाएगा।
आरके पाठक
सहायक प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र।