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थाने में जला दी गई दी गई थी विधायक और उसके बेटे की हिस्ट्रीशीट

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फिरोजाबाद। सत्ता के दबाव में पुलिस किस हद तक जा सकती है इसका सनसनीखेज खुलासा शिकोहाबाद थाने में हुआ है। सपा की सरकार के दौरान सपा के कद्दावर नेता और सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव और उनके पुत्र जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू की हिस्ट्रीशीट जला दी गई। एसएसपी ने निरीक्षण के दौरान इस मामले को पकड़ा और जांच शुरू करा दी। जांच में तत्कालीन मुंशी, हैड मोहर्रिर सीधे-सीधे दोषी माने जा रहे हैं। जांच की आंच तत्कालीन पुलिस अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।
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बहुजन समाज पार्टी की सरकार में विधायक हरिओम यादव और उनके बेटे विजय प्रताप यादव उर्फ छोटू की हिस्ट्रीशीट शिकोहाबाद थाने में खोली गई थी। उस समय दोनों के खिलाफ बसपा सरकार ने कई मुकदमे दर्ज कराए थे। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा की सरकार बनने के बाद सत्ता के दबाव में पुलिस ने नियमों को ताक पर रखते हुए थाने में दोनों की हिस्ट्रीशीट का रिकार्ड जला दिया गया। अब सत्ता परिवर्तन एसएसपी अजय कुमार ने द्वारा थाना शिकोहाबाद के वार्षिक निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ। मामला सामने आने पर उन्होंने इसकी जांच शुरू करा दी।

एसएसपी ने एसपी सिटी को जांच के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार जीडी में पड़े तस्करे के अनुसार 19 अप्रैल 2013 की रात 12 बजे तत्कालीन इंस्पेक्टर और सीओ ने पिता-पुत्र के हिस्ट्री खाका को थाना परिसर में नष्ट करा दिया था। शनिवार को एसपी सिटी द्वारा तलब किए गए थाने में तैनात हैड मोहर्रिर सोबरन सिंह ने अपने बयान दर्ज कराए। तत्कालीन मुंशी सियाराम को भी नोटिस भेज कर जांच अधिकारी ने तलब किया है। हालांकि मुंशी रिटायर्ड हो चुके हैं।
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एसएसपी द्वारा मामले की जांच कराए जाने के आदेश के बाद से ही थाना स्टाफ में खलबली मच गई है। दबी जुबां से थाने पर तैनात पुलिस कर्मी और दरोगाओं में इसकी चर्चा जोरों पर है। लेकिन कोई भी इस मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
एसएसपी अजय कुमार का कहना है कि गत दिनों थाने के निरीक्षण के दौरान उन्हें पता चला कि विधायक हरिओम यादव और उनके पुत्र विजय प्रताप छोटू की एचएस जला दी गई है। उन्होंने एससपी सिटी को जांच सौपी है। यह संगीन मामला है। जांच रिपोर्ट आने पर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच के दायरे में तत्कालीन एसएसपी भी इस लिए आ सकते हैं क्योंकि एक जगह उनके हस्ताक्षर भी पाए गए हैं। हो सकता है यह हस्ताक्षर फर्जी हों, लेकिन जांच के बाद की सब कुछ पचा चलेगा।
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