स्वच्छ भारत मिशन को नगर पालिका पलीता लगा रही है। शौचालय निर्माण के लिए मिले आवेदनों की जांच के कार्य तक में लापरवाही हो रही है। जिससे जरूरतमंदों के शौचालय निर्माण नहीं हो पा रहे। ऐसे तमाम लोग खुले में शौंच जाने को मजबूर हो रहे हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नगर पालिका क्षेत्र में 17899 आवासीय परिसर हैं। इन आवासीय परिसरों में से 7532 आवासों में आज भी शौचालय नहीं हैं। इन परिवारों के सदस्य खुले में शौच जाने को मजबूर रहते है। सुबह जल्दी उठकर नालियों, रेल पटरियों आदि के किनारे बैठकर अपनी दैनिक क्रिया से निवृत होना पड़ता है। शासन की योजना के तहत शौचालय निर्माण के लिए इन परिवारों ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में अपने आवेदन किए।
योजना के तहत आवेदन पत्रों की पहले जांच कराई जाती है। जांच में पात्र पाए जाने पर आवेदक को योजना का लाभ दिया जाता है। शासन से शौचालय निर्माण को 8000 रुपये की धनराशि दी जाती है। इस महत्वपूर्ण योजना में पालिका की लापरवाही सामने आई है। अभी तक मिले आवेदनों में से मात्र 914 आवेदन पत्रों की जांच का कार्य ही पूरा हो सका है। आवेदन पत्रों की जांच के बाद जो पात्र पाए गए उनको योजना का धन देने में भी लापरवाही हो रही है। अभी तक मात्र 817 आवेदनों को ही स्वीकृत किया गया है। जांच में हो रही देरी से तमाम पात्र लोग धन मिलने की आस में टकटकी लगाए हुए हैं। पालिका अध्यक्ष रूप किशोर कुशवाह का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन को पालिका प्रशासन काफी गंभीर है। आवेदन पत्रों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे शीघ्र शौंचालयों का निर्माण हो सके।